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केवल रेगुलर करने की स्थिति में ही अनुबंध की सेवाओं का रिटायरमेंट बेनिफिट में लाभ

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नई नियुक्ति तो पूर्व की सेवाओं का लाभ नहीं : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने सीटीयू के ड्राइवर से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए खारिज किया कैट का फैसला
कहा- केवल सेवाएं नियमित करने की स्थिति में ही मिल सकता है पूर्व में दी गई अनुबंध सेवाओं का लाभ

विवेक शर्मा
चंडीगढ़। अनुबंध के आधार पर दी गई सेवाओं को तभी पेंशन लाभ के लिए जोड़ा जा सकता है जब सेवाओं को नियमित किया गया हो। यदि कर्मी नई नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होकर नौकरी पाता है तो अनुबंध के आधार पर दी गई सेवाओं को पेंशन लाभ के लिए नहीं जोड़ा जा सकता। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम आदेश चंडीगढ़ प्रशासन की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है साथ ही कैट के आदेशों को खारिज कर दिया है।
यूटी प्रशासन की ओर से याचिका दाखिल करते हुए बताया गया कि ड्राइवर को 15 दिसंबर 1998 में अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया था और 13 जुलाई 1999 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इसे उसने कैट में चुनौती दी थी और कैट ने रेगुलर नियुक्तियां न होने तक उसकी सेवाओं को जारी रखने के आदेश दिए थे। इसके बाद सीटीयू में 106 ड्राइवरों की नियुक्ति निकली, जिसके लिए याची ने आवेदन किया और उसे 29 अप्रैल 2004 को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया। इसके बाद उसको अयोग्य करार देते हुए नियुक्ति रद्द कर दी गई। उसने इसे फिर से कैट में चुनौती दी गई जिसे कैट ने मंजूर कर नियुक्ति देने के प्रशासन को आदेश दिए थे। 2013 में जब याची रिटायर हुआ तो उसने नई पेंशन स्कीम के स्थान पर पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ जारी करने की मांग की जिसे प्रशासन ने नामंजूर कर दिया। फिर से ड्राइवर ने इसे कैट में चुनौती दी जिसे मंजूर करते हुए कैट ने उसे पुरानी पेंशन स्कीम के अनुसार रिटायरमेंट लाभ जारी करने के आदेश दिए। कैट के उस आदेश को चुनौती देते हुए यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। यूटी प्रशासन की ओर से दलील दी गई थी कि अनुबंध के आधार पर दी गई सेवाओं को पेंशन लाभ के मामले में नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इस पर ड्राइवर के वकील की ओर से कुछ जजमेंट पेश की गई जिसमें अनुबंध की सेवाओं को पेंशन लाभ के लिए जोड़ने के ओदश दिए गए थे।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि जब कोई व्यकित किसी भर्ती में आवेदन कर नौकरी पाता है तो वह उसकी नई नियुक्ति की श्रेणी में आती है और ऐसे में उसे अनुबंध के आधार पर दी गई सेवाओं का लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ड्राइवर की नियुक्ति 89 दिन के लिए अनुबंध पर हुई थी और इसके बाद उसकी सेवा समाप्त कर दी गई थी। न्यायिक आदेश के चलते रेगुलर नियुक्तियां न होने तक उसे सेवाएं जारी रखने की छूट दी गई थी। ऐसे में ड्राइवर न्यायिक आदेश के चलते मिली छूट को कानूनी हक बनाकर पुरानी पेंशन स्कीम के लाभ हेतू दावा नहीं कर सकता है।
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