अकाल तख्त पर नहीं पेश हुए गुरुद्वारा कमेटी प्रधान
गुरदासपुर।
कस्बा काहनूवान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा छोटा घल्लूघारा की प्रबंधक कमेटी के प्रधान मास्टर जौहर सिंह सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश नहीं हुए। मास्टर जौहर सिंह का कहना है कि वह ज्ञानी गुरबचन सिंह को अकाल तख्त का जत्थेदार नहीं मानते हैं।
उल्लेखनीय है कि गुरुद्वारा साहिब में पिछले दिनों हुए अनैतिक कार्य को लेकर गत 20 अगस्त को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार गुरबचन सिंह अन्य सदस्यों सहित वह पहुंचे थे। जत्थेदार ने लोकल कमेटी को अपना पक्ष रखने के लिए 28 अगस्त को अमृतसर अकाल तख्त पर तलब किया था। अपना पक्ष रखने के लिए गुरुद्वारा घल्लूघारा के प्रधान मास्टर जौहर सिंह कमेटी समेत श्री अकाल तख्त नहीं गए। इस संबंधी जब लोकल छोटा घल्लूघारा गुरुद्वारा के प्रधान मास्टर जौहर सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने पहले तो कहा कि उन्हें इस संबंधी कोई पत्र मिला ही नही। पूरी संगत के सामने जत्थेदार की ओर से 28 अगस्त को पेश होने संबंधी माइक पर बोलने पर उन्होंने कहा कि अकाल तख्त के जत्थेदार सिख कौम में सर्वोच्च है। जिनका फैसला सारी सिख संगत मानती है। वह यहां सुच्चा सिंह लंगाह व सेवा सिंह सेखवां को साथ लेकर आए और अपना फैसला सुना दिया।
उन्होंने साफ तौर पर कितने मामले हैं, जहां खुद सिंह साहिबान जाकर फरमान सुनाते। उन्होंने कहा कि उन्हें बोलने तक नही दिया गया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सिख साहिब अगर अकेले आते तो हम बनती मर्यादा के अनुसार उनका पूरा मान सम्मान करते पर वह तो लंगाह व सेखवंा समेत अन्य को साथ लेकर यहां कब्जा करने आए थे। ऐसा करके साथ आए लोग यहां का माहौल खराब करने की फिराक में थे। मास्टर जौहर सिंह ने कहा कि जांच कमेटी के अधीन है और वह अपना पक्ष सरबत खालसा सम्मेलन में चुने गए श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ध्यान सिंह मंड को सामने रख चुके है। हम उन्हें ही अकाल तख्त का जत्थेदार मानते है। वह जो भी फैसला लेंगे हमें मंजूर हैै। उल्लेखनीय है कि कि गुरुद्वारा कमेटी ने कोर्ट में स्टे की याचिका दायर की थी और 31 अगस्त तक का स्टे कमेटी के पास है।