चंडीगढ़। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। अब उनके स्कूलों की 41336 कक्षाएं स्मार्ट हो गई हैं। इसका सीधा असर स्कूलों के दाखिलों पर भी पड़ा है। 2020-21 के नए शिक्षण सत्र में पिछले के मुकाबले 15 प्रतिशत नए विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। अब तक शिक्षा विभाग राज्य के 13000 स्कूलों का कायाकल्प कर चुका है।
स्कूल शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि अब तक 12,976 स्कूलों को स्मार्ट स्कूलों में बदल दिया गया है। शिक्षा मंत्री विजय इंद्र सिंगला ने यह प्रोजेक्ट लागू करने के लिए सितंबर 2019 में स्मार्ट स्कूल नीति लागू की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार करना और शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाना था। इस मुहिम के अधीन दो साल से भी कम समय में तकरीबन 13 हजार स्कूलों में 41336 कक्षाओं को स्मार्ट बनाया जा चुका है।
प्रवक्ता के अनुसार स्मार्ट स्कूलों को अमल में लाने के लिए गांवों की पंचायतों, विभिन्न नेताओं, भाईचारों, दानी सज्जनों, स्कूल प्रबंधन समितियों, प्रवासी भारतीयों और स्कूलों स्टाफ द्वारा बहुमूल्य योगदान दिया गया है। स्कूलों के कमरों, खेल मैदानों, शिक्षा पार्कों, साइंस लैबोरेटरियों और पखानों की स्थिति में सुधार लाया गया है। ये स्मार्ट स्कूल आम स्कूलों की अपेक्षा पूरी तरह अलग हैं। स्मार्ट स्कूल प्रौद्योगिकी आधारित सीखने वाली संस्थाएं हैं, जो कि विद्यार्थियों के समूचे विकास के अलावा समाज आधारित सूचना और ज्ञान के लिए बच्चों को तैयार करती हैं। प्रत्येक स्मार्ट स्कूल के विद्यार्थी-अध्यापक अनुपात के अनुसार हर सेक्शन के लिए अलग क्लास रूम है। ये काफी खुले, हवादार और हरे, सफेद बोर्डों वाले हैं।