हरियाणा के पानीपत में मौजूद बाहरी मजदूरों को राशन व आर्थिक मदद के लिए मजदूर संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफर ट्रेड यूनियन (इफ्टू) ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें आरोप लगाया है कि पानीपत में हजारों मजदूर भुखमरी का शिकार हो रहे हैं। सरकार उन्हें राशन व आर्थिक मदद नहीं दे रही है।
प्रांतीय संयोजक पीपी कपूर ने आरोप लगाया है कि सरकार मजदूरों को अहमियत नहीं दे रही है। जेल के कैदी को भी भरपेट भोजन मिलता है, लेकिन इन बाहरी मजदूरों को भोजन के नाम रोजाना अपमानित किया जा रहा है। कपूर ने बताया कि भुखमरी के शिकार 4000 से ज्यादा मजदूरों की सूची डीसी पानीपत व अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) धनपत सिंह को दे चुके हैं।
बावजूद इसके इन मजदूरों को न तो राशन, भोजन दिया जा रहा है और ना ही कोई आर्थिक सहायता दी जा रही है। पश्चिमी बंगाल, यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश आदि राज्यों के दो लाख से ज्यादा मजदूर प्राइवेट लेबर क्वार्टरों, बस्तियों में किराये पर रहकर फैक्ट्रियों में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। इनके पास ना तो स्थानीय राशन कार्ड है, न वोटर कार्ड व आधार कार्ड हैं।
इसलिए स्थानीय राजनीतिक दल, प्रशासन व सरकार श्रमिकों की ओर आंखें मूंदे हुए हैं। अधिकांश मजदूर बस्तियों तक जिला प्रशासन का भोजन नहीं पहुंच रहा। मजदूर संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि पानीपत के सभी मजदूरों को तुरंत राशन व आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश हरियाणा सरकार को दिए जाएं।