चंडीगढ़। कोरोनाकाल में अनाथ हुए बच्चों को अभी भी सरकारी आर्थिक मदद का इंतजार है। अभी तक कुल 99 अनाथ बच्चों में से 60 बच्चों को ही आर्थिक मदद मिलनी शुरू हुई है, जबकि 39 बच्चों को योजना का लाभ नहीं मिला है। इसके अलावा 3507 ऐसे बच्चे हैं, जिनके एक अभिभावक माता या फिर पिता की मौत हुई है। इनके लिए अभी सरकार की तरफ से कोई योजना शुरू नहीं की गई है। प्रदेश सरकार ने अनाथ बच्चों की देखरेख से लेकर तमाम सुविधाएं देने की घोषणा की गई थी। जून के बाद सभी जिलों से डाटा मांगा गया था। प्रदेश में ऐसे 99 बच्चे चिन्हित किए गए हैं।
किस जिले में कितने बच्चे हुए अनाथ
सरकार की तैयार की गई लिस्ट में कुल 99 अनाथ बच्चे हैं। इनमें फतेहाबाद-हिसार 8-8, सिरसा- गुुरुग्राम-कैथल-चरखीदादरी 4-4, अंबाला-नारनौल-पानीपत-यमुनानगर-मेवात 3-3, करनाल-फरीदाबाद-पलवल में 2-2, पंचकूला जिले में 1 बच्चा अनाथ हुआ है।
2500 प्रतिमाह और सालाना 12000 की मिलती है मदद
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत प्रतिमाह 2500 रुपये दिए जाएंगे। शिक्षा के लिए प्रति वर्ष 12000 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। 18 साल तक आयु तक 1500 रुपये प्रति माह वित्तीय सहायता आवर्ती जमा खाते में जमा कराई जाएगी। 21 साल के होने पर उसे मिल सकेगी। अनाथ किशोरियों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में शिक्षा में वरियता के साथ आवासीय सुविधा दी जाएगी। शादी के समय 51 हजार दिए जाएंगे। 8 से 12वीं तक पढ़ाई के लिए बच्चों को टेबलेट दिए जाएंगे। जिन बच्चों का अभिभावक नहीं, उनको राज्य के बाल देखरेख संस्थानों में रखा जाएगा
जिला स्तरीय कमेटी करती है फैसला
सभी जिलों में डीसी की अध्यक्षता में जिला अनुमोदन समिति बनाई गई है। इसमें सीएमओ, जिला कार्यक्रम अधिकारी, सीडब्ल्यूसी, जिला संरक्षण अधिकारी सदस्य होते हैं। इस कमेटी की मंजूरी के बाद बच्चे की आर्थिक मदद शुरू की जाती है। महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी ने बताया कि अब तक 60 बच्चों की मदद शुरू हो गई, शेष की भी जल्द शुरू हो जाएगी।