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कोर्ट की फटकार के बाद बैकफुट पर एमसी, कहा 10 दिन में देंगे मुआवजा

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फ्लैग: बंदर के टाइल गिराने से युवक की मौत का मामला: हाईकोर्ट की फटकार के बाद बैकफुट पर एमसी
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हेडिंग: 10 दिन में देंगे पीड़ित परिजन को 13 लाख मुआवजा: एमसी कमिश्नर
इस जानकारी के बाद हाईकोर्ट ने अर्जी का किया निपटारा

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बंदर की गिराई टाइल से युवक की मौत मामले में सिंगल बेंच हाईकोर्ट के 13 लाख मुआवजा जारी करने के आदेश के खिलाफ अपील पर मंगलवार को एमसी बैकफुट पर दिखी। कोर्ट के आदेश के अनुसार एमसी कमिश्नर ने हाजिर हुए और बताया कि एमसी 10 दिन के भीतर मुआवजा राशि पीड़ित परिवार को जारी कर देगी। एमसी की इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने अर्जी का निपटारा कर दिया।
मामला इमारत से बंदर द्वारा गिराए गए पत्थर के कारण 17 साल के युवक की जान जाने से जुड़ा हुआ है। याची की वकील एडवोकेट एकता ठाकुर ने सिंगल बेंच के समक्ष पैरवी की थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद सिंगल बेंच ने मुआवजे के लिए दाखिल मृतक के परिजनों की याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें 13 लाख मुआवजे का हकदार बताया था। इस फैसले के खिलाफ एमसी ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। एमसी ने अपनी अपील में कहा था कि बंदर के ईंट गिराने के चलते मौत हुई इसके लिए हम जिम्मेदार कैसे हो सकते हैं? इसके लिए वन विभाग को जिम्मेदार माना जाना चाहिए। एमसी ने कहा कि कल किसी को सांप काट लेगा तो भी क्या एमसी को मुआवजे के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जाएगा। एमसी ने इसी आधार पर मुआवजे की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपने की अपील की है। उपहार सिनेमा का उदाहरण देते हुए बताया गया कि उस मामले में भी एमसी को मुआवजे के लिए जिम्मेदार बताया गया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा था कि हादसा एमसी लिमिट में हुआ है। केवल इसलिए एमसी को मुआवजे के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
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एमसी और वन विभाग आपस में सुलझाएं विवाद
वन्य जीवों के कारण दुर्घटना के लिए एमसी की जिम्मेदारी न होने की दलीलों पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एमसी को सलाह दी कि यह कार्य विभागीय स्तर पर किया जाए। कोर्ट ने कहा कि एमसी की अपील में यह मुद्दा उठाया गया है जिसे बेहतर तरीकेसे आपसी तालमेल से ही निपटाया जा सकता है। इसके लिए कोर्ट के आदेश बाद की बात है। पहले अपने स्तर पर इस दिशा में प्रयास किए जाने जरूरी हैं।
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