विधानसभा में न मिलेंगे लिखित उत्तर, न टेबल पर बिल
पंजाब ई-विधानसभा प्रोजेक्ट पर फैसला जल्द
कैप्टन अमरिंदर ने प्रोजेक्ट को दी सैद्धांतिक मंजूरी
गवर्नेंस विभाग करेगा केंद्रीय नीति आयोग से वार्ता
हर्ष कुमार सलारिया
चंडीगढ़।
विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों के टेबलों पर कागज और फाइलों के ढेर नहीं दिखाई देंगे। हर विधायक के सामने टेबल पर एक टच स्क्रीन लगी होगी, जिस पर विधायक अपने पूछे गए सवालों के साथ सत्ता पक्ष की ओर से दिए गए उसके जवाब भी पढ़ सकेंगे। सत्र के दौरान विधायकों को लिखित उत्तर, बिलों की प्रतियां आदि देने जैसा कोई काम नहीं होगा। इसके अलावा विधानसभा सत्र के दौरान होने वाले अन्य कामकाज भी बगैर कागज-पत्र यानी पेपरलेस हो जाएंगे। यह नजारा आने वाले कुछ महीनों में पंजाब विधानसभा में दिखाई देने वाला है। हालांकि 14 जून से शुरू हो रहा विधानसभा का बजट सत्र पहले जैसा ही होगा।
पंजाब सरकार प्रशासनिक सुधारों के तहत जल्द ही ई-विधानसभा प्रोजेक्ट लाने जा रही है, इसके लागू होते ही पंजाब विधानसभा में सारा कामकाज पेपरलेस हो जाएगा। साथ ही, विधानसभा के कामकाज को आनलाइन भी मुहैया कराया जाएगा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ई-विधानसभा के प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और इसे लागू करने के लिए राज्य सरकार ने केंद्रीय नीति आयोग से बातचीत भी कर ली है। इस पूरे प्रोजेक्ट को लागू करने में करीब 15 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसका भुगतान केंद्र सरकार की ओर से किया जाएगा। हालांकि ई-विधानसभा के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पंजाब सरकार को ही तैयार करना होगा। इस मामले में पंजाब का गवर्नेंस विभाग सहयोग देगा।
देश की दूसरी ई-विधानसभा होगी पंजाब में, हरियाणा पिछड़ा
उल्लेखनीय है कि यूपीए के शासनकाल के दौरान शुरू हुई योजना के तहत देश में पहली ई-विधानसभा की स्थापना हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा करीब दो साल पहले की गई थी। उसी समय हरियाणा में मनोहर सरकार के आगमन के साथ ही विधानसभा को पेपरलेस बनाने का एलान किया गया, लेकिन हरियाणा में यह प्रोजेक्ट अब तक लागू नहीं हो सका है। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा स्पीकर ब्रिज बिहारी लाल बुटेल की देखरेख में ई-विधानसभा प्रोजेक्ट को पूरा किया गया, जिसे देखने और समझने के लिए हरियाणा के स्पीकर कंवरपाल गुर्जर ने वहां का दौरा भी किया था। पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने ई-विधानसभा प्रोजेक्ट में दिलचस्पी लेते हुए राज्य के गवर्नेंस विभाग के अधिकारियों को केंद्र सरकार से बातचीत का जिम्मा सौंपा है। पंजाब ई-विधानसभा के इस प्रोजेक्ट को जल्द ही केंद्रीय नीति आयोग से मंजूरी मिलने के संकेत गवर्नेंस विभाग ने भी दिए हैं।
वर्जन
इस प्रोजेक्ट के लिए नीति आयोग के सामने मामला रखा गया है। इसको लागू करने के लिए और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर 15-20 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसका भुगतान केंद्र सरकार की ओर किया जाना है। नीति आयोग से अनुमति मिलते ही पंजाब की ई-विधानसभा तैयार हो जाएगी।
-राणा केपी सिंह, स्पीकर, पंजाब विधानसभा।