ओपेरा में पंजाबी संस्कृति को देखना अनोखा अनुभव
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हमने कई बार ओपेरा अंग्रेजी में देखा है। पहली बार पंजाब की लोककथाओं और रीति रिवाज को ओपेरा में देखना शहरवासियों के लिए एक अनोखा अनुभव रहा। कलाकारों ने पंजाब में बच्चे के जन्म से लेकर शादी विवाह तक के रीति-रिवाज को बेहद खूबसूरती से पंजाबी लोकगीतों के साथ पेश किया। टैगोर थियेटर सेक्टर-18 में वीरवार को पंजाबी थियेटर फेस्टिवल के अंतिम दिन चैन बदलां दा (एन ओपेरा इन पंजाबी) की प्रस्तुति दी गई। इसमें हर आयु वर्ग के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। इसमें महिलाओं के बैंड ने शादी से लेकर अन्य जश्न पर पंजाबी लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति दी। चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से नई दिल्ली के तमाशा ग्रुप ने यह प्रस्तुति दी। इसका निर्देशन मदन लाल सिंधु ने किया।
दरअसल, ओपेरा एक कठिन प्रदर्शन कला है। इसमें कलाकारों को गायन, नृत्य और अभिनय दोनों में कुशल होना चाहिए। इसमें ओपेरा को अविभाजित पंजाब की लोककथाओं के साथ बुना गया। इसमें पंजाबी नाटककार व निर्देशक अभिनेता शीला भाटिया को उनके प्रोजेक्ट मदन बाला सिंधु द्वारा श्रद्धांजलि दी गई।