सदन में पार्षद और अधिकारी आमने-सामने
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
नगर निगम सदन में सोमवार को अलग-अलग मुद्दों पर अधिकारियों और पार्षदों के बीच टकराव की स्थिति बनी। उस समय स्थिति ज्यादा गंभीर बनी, जब पूर्व मेयर आशा जसवाल ने कहा कि जिन लोगों को हाउस टैक्स के नोटिस नहीं भेजे जाने चाहिए, उन्हें भेजे जा रहे हैं। इससे अधिकारियों की मंशा का पता चलता है। इस पर अतिरिक्त कमिश्नर अनिल गर्ग ने आपत्ति जताते हुए कहा कि पिछले साल के मुकाबले में इस बार हाउस टैक्स ज्यादा इकट्ठा हुआ है।
उन्होंने बताया कि पिछले साल 3.99 करोड़ रुपये हाउस टैक्स से इकट्ठे हुए थे, जबकि इस बार 9.50 करोड़ रुपये इकट्ठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता था कि ज्यादा हाउस टैक्स इकट्ठा करने पर उनकी तारीफ होगी, लेकिन यह तो प्रतिष्ठा पर सवाल उठाया जा रहा है। इस पर आशा जसवाल के साथ उनके साथी पार्षद भड़क उठे। भाजपा पार्षद रवि शर्मा और सतीश कैंथ ने कहा कि गर्ग को पूर्व मेयर आशा जसवाल को ऐसा नहीं बोलना चाहिए था। इसके बाद भाजपा पार्षद राजेश कालिया ने एक बार फिर अपने साथ हुए अपमान का जिक्र करते हुए एमओएच डॉ. एम भट्टी का मामला उठाया। पिछले साल यह निर्णय हुआ था कि डॉ. भट्टी को वापस उनके मूल राज्य पंजाब भेजा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद पार्षदों का टकराव अतिरिक्त कमिश्नर सौरभ मिश्रा के साथ तब हुआ, जब 12 अस्थायी चालकों को निकालने की बात सामने आई।
एक बार फिर माहौल गरमाया, जब चंद्रवती शुक्ला ने सेक्टर-52 में सीवरेज बंद होने की शिकायत की। शुक्ला ने कहा कि पिछले एक साल से वह पाइप लाइन बदलवाने की मांग कर रही है। इस पर सुपरिटेंडट इंजीनियर ने कहा कि लोगों ने अपने मकानों के बाहर अतिक्रमण कर रखा है। अगर खुदाई की गई तो मकान गिर जाएगा। कमिश्नर ने कहा कि पार्षद अतिक्रमण हटवाने की जिम्मेवारी लें, पाइप लाइन बदलवा दी जाएगी। इस पर पूर्व मेयर आशा जसवाल भड़क गईं। उन्होंने कमिश्नर ने कहा कि अधिकारियों ने समय रहते अवैध कब्जे हुए क्यों नहीं रोके। अब पार्षद जिम्मेवारी क्यों लें। कमिश्नर ने कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए कोई भी कर्मचारी 24 घंटे काम नहीं कर सकता। एक मामले में पूर्व मेयर आशा जसवाल ने तो यह भी कहा कि अप्रैल फूल तो अधिकारी बनाते हैं।
टैक्सी स्टैंड 31 मार्च के बाद भी नहीं हटेंगे
सदन में फैसला लिया गया कि 31 मार्च तक टैक्सी स्टैंड हटाने के आदेश अगले माह सदन की बैठक होने तक स्थगित कर दिए गए हैं। नगर निगम ने जनवरी महीने में सभी टैक्सी स्टैंड खाली करने के लिए कहा था ताकि नए सिरे से ई-टेंडरिंग से टैक्सी स्टैंड अलाट किए जा सकें, लेकिन अब नगर निगम पहले से बैठे आपरटेरों को राहत देने के लिए कोई न कोई हल निकाल रहा है, जिसका प्रस्ताव अगले माह होने वाली बैठक में आएगा।
लग्जरी कमरों पर चर्चा को मेयर ने रोका
पूर्व मेयर अरुण सूद पीएम और राष्ट्रपति के आने पर यूटी गेस्ट हाउस में कमरों के रेनोवेशन के लिए जो करोड़ों रुपये खर्चा है, उस पर चर्चा करना चाहते थे, जिसके लिए मेयर देवेश मोदगिल ने मंजूरी नहीं दी। मेयर ने कहा कि यह रेनोवेशन प्रशासन कर रहा है। यह नगर निगम का हिस्सा नहीं है। इस पर सूद ने कहा कि वह जनप्रतिनिधि हैं। लोग उनसे भी सवाल पूछते हैं।
कोई पैदल तो कोई ई रिक्शा पर आया
सोमवार को हुई बैठक में मेयर ने सभी पार्षदों को साइकिल पर आने के लिए कहा था, जिसमें से कई पार्षद साइकिल पर आए। मेयर देवेश मोदगिल, अकाली पार्षद हरदीप सिंह, कांग्रेस पार्षद गुरबख्श रावत सहित कई पार्षद साइकिल पर आए, जबकि देवेंद्र सिंह बबला रिक्शा पर आए और मनीमाजरा के जगतार जग्गा ई-रिक्शा पर नगर निगम आए। पूर्व मेयर राज बाला मलिक अपने घर से पैदल नगर निगम पहुंचीं। सीनियर डिप्टी मेयर गुरप्रीत ढिल्लों ने सदन में कहा कि साइकिल ट्रैक की हालत ठीक नहीं है।