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पीजीआई के पहले लाइव डोनर लिवर ट्रांसप्लांट के मरीज की मौत

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पीजीआई के पहले लाइव डोनर लिवर ट्रांसप्लांट के मरीज की मौत
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छह वर्षीय सूरज में फैल गया था इंफेक्शन, ट्रांसप्लांट के बाद बच्चा ठीक था
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पिछले महीने छह साल के बच्चे में पीजीआई ने पहला लाइव डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया था। करीब 22 दिन बाद वीरवार को बच्चे ने दम तोड़ दिया है। मौत की मुख्य वजह इंफेक्शन बताया जा रहा है। बीते 24 जनवरी को झारखंड के रहने वाले छह वर्षीय सूरज में उसकी दादी के लिवर का कुछ हिस्सा ट्रांसप्लांट किया था। वह लिवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित था। पहले उसका इलाज झारखंड में चल रहा था। बाद में दिल्ली में और फिर चंडीगढ़ पीजीआई में।
पीजीआई की ओर से बताया गया है कि ट्रांसप्लांट के बाद सूरज के स्वास्थ्य में लगातार सुधार आ रहा था। वह खाना खा रहा था। गेम्स खेलता था। लिवर अच्छी तरह से काम कर रहा था। बीते बुधवार से उसकी हालत बिगड़ने लगी थी। बच्चे की आंत में गंभीर संक्रमण पनपने लगा। उसकी आंतों में सूजन आ चुकी थी, जिसकी वजह से अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। उसे आपरेशन के लिए भी लेकर गए, लेकिन बात नहीं बन सकी। ऑपरेशन के लिए 48 घंटे तक इंतजार किया, लेकिन वह जीवित नहीं बच सका। पीजीआई के मुताबिक ट्रांसप्लांट के बाद पहला महीना काफी नाजुक होता है। इंफेक्शन जैसी कई दिक्कतों के आसार होते हैं।
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बच्चे के शव को झारखंड ले जाने के नहीं थे पैसे
सूरज के परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार झारखंड में करने के बजाय चंडीगढ़ में ही किया। उनके मुताबिक उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि शव को झारखंड ले जाए। उन्होंने कहा कि पीजीआई के डाक्टरों ने उसे बचाने के लिए जी जान लगा दी। डाक्टरों की ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी गई।
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18 घंटे चला था आपरेशन
सूरज में ट्रांसप्लांट के दौरान करीब 18 घंटे का वक्त लगा था। सुबह से लेकर देर रात तक आपरेशन चलता रहा था। सूरज में उसकी 49 वर्षीय दादी से लिवर का कुछ हिस्सा लिया गया था। यह पीजीआई का पहला लाइव डोनर लिवर ट्रांसप्लांट था। इसके लिए बाकायदा पीजीआई की ओर से प्रेस रिलीज कर जानकारी दी गई।
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