रोहतक और नोएडा के ध्यानार्थ
मोरनी हिल्स में अवैध गेस्ट हाउस हटाने को याचिका
हाईकोर्ट ने क्षेत्र के पांच गांवों के लोगों की याचिका पर हरियाणा सरकार को दिया नोटिस
अवैध गेस्ट हाउसों पर कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट भी तलब
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंचकूला शहर से सटे मोरनी हिल्स इलाके में चल रहे 20 से ज्यादा अवैध गेस्ट हाउस के खिलाफ मोरनी के ही पांच गांवों के लोग अदालत पहुंच गए हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर याचिका पर मंगलवार को चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार को 29 जनवरी के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। इसके साथ ही, याचिका में उठाए गए मुद्दे पर ध्यान देते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार से उन शिकायतों पर अब तक की कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट भी तलब कर ली है, जो ग्रामीणों ने उन अवैध गेस्ट हाउस को लेकर सरकार से की थीं।
उल्लेखनीय है कि इस याचिका पर पहले जस्टिस महेश ग्रोवर की खंडपीठ ने सुनवाई की थी और खंडपीठ ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए याचिका को जनहित याचिका करार देते हुए चीफ जस्टिस की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया था। मंगलवार को चीफ जस्टिस की डबल बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की।
मोरनी हिल्स के पांच गांवों भराल, थेपली, मटोर, नाडावाला और चंडी के 20 निवासियों ने एडवोकेट सुरजीत सिंह सलार के मार्फत दायर याचिका में कहा है कि उनके क्षेत्र में बने सभी गेस्ट हाउस अवैध हैं क्योंकि पूरा क्षेत्र पेरीफेरी नियंत्रण एक्ट के तहत अधिसूचित किया जा चुका है। ऐसे में पूरे क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण पर पूर्ण पाबंदी है। इसके बावजूद पूरे इलाके में लगातार गेस्ट हाउसों का निर्माण होता रहा। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह अवैध निर्माण स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के सहयोग के बिना संभव नहीं है। याचिका में यह भी बताया गया कि क्षेत्र में अवैध गेस्ट हाउस तो बन ही गए, वहीं इनमें कई तरह के असामाजिक और अनैतिक कार्य भी चल रहे हैं, जिनकी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। याचिका में कहा गया है कि ये अवैध गेस्ट हाउस अय्याशी के अड्डे बने हुए हैं। जिस कारण स्थानीय लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों और स्कूली बच्चों को इन्हीं अवैध गेस्ट हाउसों के आगे से गुजरना पड़ता है और बच्चों पर वहां चल रही गतिविधियों का बुरा असर पड़ता है।
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सीएम विंडो पर शिकायत, नहीं हुई कार्रवाई नहीं
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने इस पूरे हालात को लेकर मुख्यमंत्री को सीएम विंडो पर शिकायत भी दी। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन और पुलिस को भी कई बार वहां की गतिविधियों की जानकारी दी गई, लेकिन कहीं से कोई कार्रवाई नहीं की गई। कहीं भी सुनवाई नहीं होने के कारण ही उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पूरे क्षेत्र में अवैध गेस्ट हाउसों को हटाने की मांग की।