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प्री र्नसरी की सीट कम अभिभवाक हुए परेशान

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मनीमाजरा के चार सरकारी स्कूलों में घटीं प्री-नर्सरी की सीटें, अभिभावक परेशान
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सबहेड
मजबूरी में अब प्राइवेट स्कूलों में कराना पड़ेगा दाखिला, जेब पर पड़ेगा बोझ

अमर उजाला ब्यूरो
मनीमाजरा। दिसंबर शुरू होते ही अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले के लिए सरकारी स्कूलों की दौड़ लगाने लगते हैं। सभी अभिभावक चाहते हैं कि बच्चे का दाखिला पास के ही सरकारी स्कूल में हो जाए। तमाम प्रयास के बावजूद सभी अभिभावकों के बच्चों के दाखिले सरकारी स्कूल में नहीं होते। ऐसे में विवश होकर प्राइवेट स्कूलों में दाखिला दिलाना पड़ता है, जो काफी महंगा पड़ता है।
मनीमाजरा में ऐसे कई सरकारी स्कूल हैं, जहां प्री-नर्सरी की कक्षाएं ही नहीं हैं, वहीं कई स्कूलों में प्री-नर्सरी के सेक्शन को कम कर दिया गया। ऐसे में दाखिले के लिए सीटें घट गई हैं, जिससे अभिभावकों और परेशान हैं। बता दें कि मनीमाजरा में कुल 10 सरकारी स्कूल हैं। इन सभी स्कूलों में प्री-नर्सरी की कक्षाएं चलती थीं लेकिन इस साल इनमें से कई स्कूलों में प्रिंसिपल या स्कूल इंचार्ज की ओर से प्री-नर्सरी की कक्षाएं बंद कर दी गई हैं। इसके पीछे स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि उनके पास इन कक्षाओं के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। ऐसे में वह इन कक्षाओं का संचालन नहीं कर सकते।
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10 स्कूलों में से चार स्कूल गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल माडर्न कांप्लेक्स, गवर्नमेंट मॉडल मिडिल स्कूल पाकेट नंबर-10, गवर्नमेंट मिडिल मॉडल स्कूल माडर्न कांप्लेक्स और गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल मनीमाजरा टाउन, शिक्षा विभाग के निर्देशों के उलट दाखिला कर रहे हैं। इनमें गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल माडर्न कांप्लेक्स ऐसा स्कूल है, जिसमें दो-दो प्री नर्सरी और नर्सरी चलनी चाहिए परंतु इस बार यहां एक भी कक्षा के लिए आवेदन नहीं मांगे गए हैं। वहीं, गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल पाकेट -10 ने भी प्री-नर्सरी कक्षा को समाप्त कर इस बार केवल नर्सरी के लिए आवेेदन मांगे हैं। यही हाल गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल मनीमाजरा टाउन स्कूल का भी है। यहां भी इस बार नर्सरी कक्षा के लिए ही आवेदन मांगे गए हैं। गवर्नमेंट मिडिल मॉडल स्कूल माडर्न कांप्लेक्स में जहां पिछले साल दो प्री-नर्सरी और दो नर्सरी कक्षाएं थीं, इस बार प्री-नर्सरी की एक कक्षा को कम कर दिया गया है।

अभिभावकों के लिए खड़ी हुई मुसीबत
स्कूल प्रबंधकों का यह फैसला अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब बन गया है क्योंकि शिक्षा विभाग के अनुसार प्री-नर्सरी में उन बच्चों के आवेदन का नियम है जो आसपास के इलाकों में रहते हैं। ऐसे में दाखिले की सीटें कम होने के कारण अभिभावकों को मजबूरी में बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला दिलवाना पड़ेगा जो काफी महंगा पड़ेगा।
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कोट्स
कई स्कूलों में प्री-नर्सरी नहीं है, वो स्कूल नर्सरी से ही शुरू होते हैं। यह कोई बड़ी बात नहीं है। हो सकता है कि ऐसे स्कूलों में नर्सरी के टीचर न हों। -अनुजीत कौर, जिला शिक्षा अधिकारी, शिक्षा विभाग चंडीगढ़

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