12 लाख रुपये के लालच में मार डाला था परिवार को
रकम दोगुनी करने का लालच दे पूजा के बहाने बुलाया था परिवार को नहर पर
पूजा के दौरान एक एक कर सभी को दे दिया नहर में धक्का
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। फांसी की सजा पाने वाले खुशविंदर ने 12 लाख रुपये के लालच में एक परिवार की खुशियां तबाह कर दीं। वह इस परिवार से अच्छी तरह घुला मिला हुआ था। उसे यह बात पता चली कि परिवार के पास जमीन बेचकर 12 लाख रुपये आए हैं। इसी रुपये को पाने के लिए उसने हत्या की साजिश रची। पहले उसने परिवार के सदस्यों को अपनी बातों में फंसा लिया। इसके बाद अलसुबह नहर किनारे बैठकर ख्वाजा की पूजा करने के लिए तैयार किया। उन्हें यह भरोसा दिलाया कि पूजा के बाद रकम दोगुनी हो जाएगी। आरोपी ने इस दौरान परिवार से 12 लाख रुपये भी लाने को कहा। तय समय के मुताबिक परिवार नहर किनारे पहुंच गया। इसके बाद खुशविंदर ने कुलवंत सिंह (42), पत्नी हरजीत कौर (40), रमनदीप कौर (17) व बेटे अरविंदर(14) को लाइन में बिठा दिया और आंखें बंद करके पूजा करने के लिए कहा। इसी बीच आरोपी ने एक एक करके सभी को नहर में धक्का दे दिया। यह चारों हत्याएं तीन जून 2004 में हुई थीं। इसके बाद मृतक के साले कुलतार सिंह के बयानों पर बस्सी पठाना में पांच जून को केस दर्ज हुआ था।
मां बेटे का नहीं मिला था शव
घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। इसके बाद शवों की तलाश शुरू हुई थी। सात जून 2004 को रमनदीप और 9 जून को कुलवंत सिंह का शव नहर से निकाला गया। जबकि हरजीत कौर व उसके बेटे अरविंदर सिंह का शव आज तक बरामद नहीं हुआ।
2012 में पकड़ा गया तो कबूली वारदात
जब 2012 में खुशविंदर पकड़ा गया तो उसने सीबीआई के सामने चारों को मारने की बात कबूल ली थी। उसने सीबीआई को बताया था कि मृतक कुलवंत सिंह के परिवार ने 12 लाख की जमीन बेची थी। उसे इस बात का पता था। पैसे के लालच में उसने हत्याकांड को अंजाम दिया।
ऐसे चला यह सारा केस
दोषी का बड़ा भाई कुलविंदर मृतका हरजीत कौर के भाई कुलतार सिंह के पास काम करता था। वह मुंशी का काम देखता था। ऐसे में फतेहगढ़ पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंच पाई थी। इसके बाद 2005 में फतेहगढ़ साहिब की पुलिस ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी। यह केस अनसुलझा था। इसके बाद कुलतार सिंह के भाई की प्रार्थना पर यह केस स्टेट क्राइम ब्रांच को शिफ्ट हो गया था। तीन अगस्त 2006 में स्टेट क्राइम बांच ने भी क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी। इसके बाद कुलतार सिंह ने 2007 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली थी। 16 मार्च 2007 में अदालत ने केस सीबीआई को दे दिया था। सीबीआई भी आरोपी तक नहीं पहुंच पाई थी। इसके बाद 2009 में सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट फाइल कर दी थी।
पहले आरोपी को इस केस में हुई थी फांसी
जून 2012 में खुशविंदर एक बार फिर सुर्खियों में आया था। इस दौरान उसने अपनी पत्नी की मामी के परिवार को निशाना बनाया था। छह लोगों की नहर में फेंक कर हत्या कर दी थी। इसमें गुरमैल सिंह रिटायर्ड पंजाब पुलिस कांस्टेबल, पत्नी परमजीत कौर, बेटा गुरिंदर सिंह, निवासी मुकंदपुर लुधियाना, रुपिंदर सिंह, बेटा जसकीरत सिंह व प्रभसिमरन कौर शामिल थे। गुरमैल सिंह पुत्री जैसमीन कौर नहर में फंस गई थी, जिससे उसकी मौत होने से रह गई थी। जैसमीन कौर की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। उनसे 36 लाख रुपये की बरामदगी हो गई।
ऐसे खुला चार लोगों की हत्या का राज
छह लोगों की हत्या में पकड़े गए आरोपी खुशविंदर ने पुलिस के सामने कबूल किया कि फतेहगढ़ साहिब में 2004 में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या की हत्या भी उसी ने की थी। इसके बाद यह केस दोबारा खोला गया। सीबीआई में ट्रायल चला और अब फांसी की सजा सुनाई गई।
इन धाराओं में हुई सजा
धारा सजा जुर्माना
364 उम्रकैद पांच हजार
201 चार साल पांच हजार
302 फांसी दस हजार