अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने आम आदमी क्लीनिकों में प्रोटोकॉल-आधारित गर्भावस्था देखभाल मॉडल शुरू किया है। इसके तहत चार महीने के अंदर लगभग 20,000 गर्भवती महिलाओं ने इन क्लीनिकों में जांच करवाई है।
इस कार्यक्रम के तहत 10,000 से अधिक महिलाओं को मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्रदान की गई हैं। साथ ही 500 निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों को सूचीबद्ध करके राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि महिलाओं को विभिन्न तरह के टेस्ट करवाने की मुफ्त सुविधा प्रदान की जा सके। इस सुविधा से मात्र 120 दिन के छोटे समय में पंजाबी परिवारों को अनुमानित 1 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
उन्होंने कहा कि राज्य में माताओं की मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 90 रही है जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इन आंकड़ों ने राज्य भर में गर्भावस्था देखभाल मॉडल की तुरंत आवश्यकता को उजागर किया है। क्लीनिकों में सभी जरूरी टेस्ट किए जा रहे हैं जिसमें एचआईवी और साइफिलिस स्क्रीनिंग, खून के सभी टेस्ट, शुगर, थायरॉइड, हेपेटाइटिस, भ्रूण की दिल की धड़कन, कोलेस्ट्रॉल और हीमोग्लोबिन मूल्यांकन जैसे रूटीन और महत्वपूर्ण टेस्ट शामिल हैं।