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कार्रवाई होने से पहले ही किया रिजजाइन

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बोर्ड की मीटिंग में होनी थी कार्रवाई, एक दिन पहले इस्तीफा
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- सिटको के जीएम फाइनेंस ने अचानक वीरवार को कर दिया रिजाइन
- कम ब्याज दर पर एफडी जमा कराने के मामले में उनकी भूमिका पर उठ रहे थे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सिटको में 7.25 करोड़ रुपये की राशि कम ब्याज दर पर जमा करवाने का मामला प्रकाश में आने के बाद डिपार्टमेंट के जीएम फाइनेंस ने अचानक इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों की मानें तो इसमें जीएम फाइनेंस की अहम भूमिका होती है, इसलिए कार्रवाई होने से पहले ही इस्तीफा देकर खुद को अलग कर लिया है।
एफडी जमा कराने में हुए घपले की शिकायत सिटको यूनियन के प्रधान प्रेम लाल और चेयरमैन कश्मीर चंद ने एक माह पूर्व यूटी प्रशासन के आलाधिकारियों से की थी। उन्होंने शिकायत में बताया था कि 6 करोड़ रुपये की एफडी 9 सितंबर 2017 को मेच्योर हो गई थी। इसकी कुल राशि 7.25 करोड़ रुपये हो गई थी।
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बैंकों में जमा करवाने के लिए विभिन्न बैंकों से ब्याज दर को लेकर आवेदन मांगे गए थे। इसमें बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक ने सबसे अधिक ब्याज दर 6.70 प्रतिशत दर ऑफर की थी, जबकि नीचे से दूसरे नंबर पर सबसे कम ब्याज दर इंडियन बैंक द्वारा ऑफर की गई थी। यही कारण है कि सबसे अधिक ब्याज दर होने के चलते एक साल के लिए 3-3 करोड़ रुपये की एफडी बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक में जमा करवाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। पूरे मामले को लेकर सिटको प्रोगेसिव यूनियन बीते कई महीनों से लड़ाई लड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक एफडी मामले में सिटको के जीएम फाइनेंस की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध रही है। यूटी प्रशासन के चीफ फाइनेंस अफसर ने भी एफडी जमा करने के मामले में फ्राड उजागर किया है। इसके बाद से मामला गरमा गया। अचानक बोर्ड की मीटिंग के एक दिन पहले वीरवार को जीएम फाइनेंस ने अपना इस्तीफा सिटको प्रबंधन को सौंप दिया है।
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