पंजाब के लिए महत्वपूर्ण:-
एआईजी ने कबूला पैसे लिए थे, पर रिश्वत के नहीं
सबहेड
कहा- पैसे लोन के थे, पंजाब पुलिस के एआईजी पीएस संधू से जुड़े रिश्वत मामले में फैसला 31 को
अंतिम बहस में सीबीआई के सरकारी वकील ने उठाया सवाल, पुलिस के सीनियर अफसर की मां ने एक अपराधी को क्यों दिया लोन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जुलाई 2011 में 50 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआई के हत्थे चढ़े पंजाब पुलिस के एआईजी परमदीप सिंह संधू के मामले में वीरवार को सीबीआई की विशेष अदालत में अंतिम बहस पूरी हो गई। दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के साथ ही सीबीआई कोर्ट ने मामले में अंतिम फैसले के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की है।
पिछले सप्ताह से चल रही अंतिम बहस के दौरान एआईजी संधू ने कबूल किया कि उन्होंने शिकायतकर्ता निशांत शर्मा से पैसे लिए थे, लेकिन वह पैसे उनकी मां ने उसे जो लोन दिया था, उसकी किस्त के थे। इसके लिए उन्होंने अदालत में प्रोनोट भी पेश किया था। इस पर सीबीआई की ओर से पेश हुए सरकारी वकील केपी सिंह ने सवाल उठाया कि पंजाब पुलिस के सीनियर अधिकारी की मां को ऐसे व्यक्ति को लोन देने की नौबत क्यों आई, जिस पर पंजाब में 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें चोरी, धोखाधड़ी, फिरौती जैसे संगीन अपराध भी शामिल हैं।
साथ ही दलील दी कि, अगर ऐसा था तो आरोपी को जब उसे रंगेहाथ दबोचा गया था तो उस वक्त इस बात का जिक्र क्यों नहीं किया। इसके अलावा आरोपी ने जमानत याचिका में भी इस बारे में कुछ नहीं कहा था। वहीं मौके पर मौजूद इंडिपेंडेंट गवाहों ने भी अदालत में दिए बयान में आरोपी द्वारा मौके पर ऐसी कोई बात न कहने का बयान दिया था।
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पैसे लोन के थे तो लोन रिकवरी सूट क्यों नहीं दायर किया
संधू की ओर से दलील दी गई कि, उनकी मां ने निशांत को दो लाख रुपये लोन के तौर दिए थे। वहीं सीबीआई के वकील ने दलील दी कि पैसे लोन के थे तो क्या उनके गिरफ्तार होने के बाद उन्हें लोन अमाउंट वापस मिला। अगर नहीं तो उन्होंने इसके लिए रिकवरी सूट क्यों नहीं दायर किया।
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संधू ने सवाल उठाया, रिकार्डिंग की रिपोर्ट एक्सपर्ट ने नहीं बनाई
संधू ने सीबीआई की ओर से केस में बतौर सबूत पेश की गई रिकार्डिंग की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि, यह रिकार्डिंग रिपोर्ट जिसने बनाई थी वह एक्सपर्ट कैटेगरी में नहीं आता क्योंकि उस वक्त देश में ऐसी कोई आधिकारिक लैब ही नहीं थी। इस पर सरकारी वकील ने मद्रास हाईकोर्ट के एक फैसले को आधार बनाते हुए दलील दी कि सीएफएसएल लैब बनने से पहले जो रिपोर्ट एक्सपर्ट बनाते थे वह सभी केस में आधिकारिक तौर पर मान्य हैं।
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यह है मामला
12 जुलाई 2011 में सीबीआई ने एआईजी पीएस संधू को सेक्टर-28 स्थित एक कॉफी शॉप से 50 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। एआईजी पर निशांत शर्मा के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के केस में उसके पक्ष में रिपोर्ट बनाने के लिए 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप है। निशांत ने इसकी शिकायत सीबीआई से की थी। शिकायत के अनुसार, संधू ने निशांत से कहा था कि मोहाली में तैनात एसपी बलवंत कौर उनकी परिचित हैं। वह उससे बात कर उसका केस खत्म करवा देंगे। इसके बदले में संधू ने 3 लाख रुपये बतौर रिश्वत मांगी थी। इसकी पहली किश्त के तौर पर 50 हजार रुपये सेक्टर-28 के एक काफी शॉप पर देने की बात तय हुई थी। शिकायत की पुष्टि होने पर सीबीआई ने ट्रैप लगाकर एआईजी संधू को रिश्वत के पैसे लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया था।