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वैचारिक मतभेद को पूर्व सीएम की हत्या का आधार बनाना उचित नहीं
सबहेड
149 पेज के फैसले में अदालत ने कहा, तारा साजिश का सक्रिय सदस्य था और उसे षड्यंत्र की पूरी जानकारी थी
अमरीश शर्मा
चंडीगढ़।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेएस सिद्घू ने पूर्व सीएम बेअंत सिंह की हत्या के मामले में जगतार सिंह तारा के खिलाफ चले ट्रायल के बाद 149 पेज की जजमेंट दी। इसमें उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेदों के कारण 1995 में पंजाब के तत्कालीन सीएम की हत्या कर दी गई थी। फैसले में अदालत ने पाया कि एक आपराधिक मामले का कानूनी प्रक्रिया के तहत निपटारा होना चाहिए। यह ऐसे तय नहीं किया जा सकता है कि किस विचारधारा की पार्टी सही है और कौन सी पार्टी गलत है। इसे मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के कारण का आधार बनाने को उचित नहीं माना जा सकता।
अदालत ने यह भी माना कि, यह साबित हो चुका है कि अपराधी जगतार सिंह तारा साजिश का सक्रिय सदस्य था और षड्यंत्र के बारे में उसे पूरा पता था। सबूतों और तथ्यों के तहत साफ है कि उसने सबसे पहले कार खरीदी, जिसका इस्तेमाल वारदात के लिए किया जाना था। इसके बाद तारा कार में आरडीएक्स भी ले गया था। वहीं अदालत ने फैसले में यह भी गौर किया कि दोषी को अपने इस किए का कोई पश्चाताप या अफसोस नहीं है। बेअंत सिंह की हत्या के बाद उसने अदालत में सौंपे लिखित तर्क अपने कार्य का औचित्य सिद्ध करने की कोशिश की। अदालत के अनुसार यह कैसे तर्क संगत है कि एक उच्च गति के विस्फोट में जिसमें 17 निर्दोष लोगों की जान चली गई और 15 अन्य घायल हो गए उस पर दोषी को कोई अफसोस न हो। वहीं अदालत ने अपराधी द्वारा केस की शुरुआत से ही अलग-अलग बार दिए बयान का भी संज्ञान लिया।
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अदालत ने कहा, रेयर और द रेयरेस्ट केस नहीं
शनिवार को फैसला सुनाए जाने से पहले तारा ने अपना जुर्म कबूलते हुए बेअंत सिंह की हत्या पर कोई पश्चाताप नहीं जताया था। हालांकि उसने घटना में मारे गए अन्य 16 लोगों की मौत पर जरूर अफसोस जताया। इस पर सीबीआई की ओर से केस की पैरवी कर रहे सरकारी वकील एसके सक्सेना ने इसे रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस मानते हुए तारा के लिए सजा के तौर पर मौत की सजा के लिए अपील की। हालांकि, अदालत ने माना कि, यह परिस्थिति की संपूर्णता को ध्यान में रखते हुए इसे दुर्लभ मामला नहीं माना।