खैरा-बैंस ने सेल्फ गोल कर आसान की कांग्रेस की राह
दमदार और आक्रामक नेताओं के बिना विपक्ष के लिए मुश्किल होगा सत्ताधारियों को घेरना
राणा गुरजीत को लेकर कांग्रेस की चिंता खत्म
पहले तीन दिन अकालियों ने दे दी कांग्रेस को राहत
अखिल तलवार
चंडीगढ़।
सुखपाल खैरा और सिमरजीत सिंह बैंस ने सेल्फ गोल कर कांग्रेस की राह खुद ही आसान कर दी। दोनों ने खुद गलती कर मौका दिया और पूरे सत्र के लिए सस्पेंड कर दिए गए। अब सत्र के बाकी दिनों में दमदार और आक्रामक नेताओं के बिना विपक्ष के लिए सत्ताधारियों को घेरना काफी मुश्किल होगा। क्योंकि संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस पहले ही काफी मजबूत है।
विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत से पहले ही रेत खदानों का विवाद उठा। जिसमें कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह पर गंभीर आरोप लगे। सुखपाल खैरा ने सदन के बाहर ही राणा पर कई और गंभीर आरोप लगाए। ईडी व आयकर से उनकी शिकायत की। ऐसे में लग रहा था कि बजट सत्र में कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ सकती है। विपक्ष सत्र के दौरान राणा गुरजीत को लेकर सरकार पर तीखे हमले कर सकता है। कांग्रेस के पास अकालियों से निपटने को कई हथियार थे, लेकिन आप और लोक इंसाफ पार्टी के खिलाफ कुछ खास नहीं था। 14 जून को सत्र शुरू हुआ तो अकालियों ने ही मोर्चा संभाल लिया। अकालियों के विरोध प्रदर्शन के कारण आप या सुखपाल खैरा को राणा गुरजीत को घेरने का मौका ही नहीं मिला। अकालियों के प्रदर्शन के कारण आम आदमी पार्टी अपनी रणनीति ही नहीं बना सकी। सीएम ने जब दो मामलों में जांच के आदेश दिए तो खैरा ने राणा का मामला उठाया, लेकिन खास समय नहीं मिला।
वीरवार को सिमरजीत बैंस ने स्पीकर की चेयर पर कागज फेंके और खुद ही मौका दे दिया। इसके बाद उन्हें पूरे सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया। बैंस ही वह नेता थे, जो पिछली सरकार के दौरान अकेले सुखबीर बादल और बिक्रम मजीठिया को चुनौती देते थे। इस बार भी उनके सरकार के खिलाफ मुखर होने की उम्मीद थी। उसके बाद खैरा ऐसे नेता थे, जो तथ्यों के आधार पर राणा गुरजीत पर हमला कर सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने बेवजह वीडियो बनाकर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। अब आप-लिप में वक्ताओं के नाम पर एचएस फूलका, कंवर संधू और अमन अरोड़ा हैं, लेकिन ये खैरा की तरह आक्रामक नहीं हैं। अकाली रेत खदानों का मुद्दा उठाएं नहीं, क्योंकि सरकार के पास उनका मुंह बंद करने के लिए बहुत कुछ है।