रोहतक और नोएडा के ध्यानार्थ
कोचिंग देने वाले संस्थान की पेपर लीक में भूमिका नहीं: एसआईटी
भ्रष्टाचार मामले में दोषी करार मजिस्ट्रेट एसएस भारद्वाज का था संस्थान
हाईकोर्ट ने एसआईटी से एचसीएस जूडिशियल पेपर लीक जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एचसीएस (जूडिशियल) पेपर लीक मामले में शिकायतकर्ता और आरोपी जिस इंस्टीट्यूट में कोचिंग ले रहे थे उसकी इस मामले में कोई भूमिका नहीं है। एसआईटी ने कोर्ट द्वारा पूछे गए एक सवाल पर पक्ष रखते हुए भ्रष्टाचार मामले में दोषी करार मजिस्ट्रेट एसएस भारद्वाज के संस्थान को क्लीन चिट दे दी है।
इस दौरान एसआईटी ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए समय दिए जाने की अपील की। कोर्ट ने इसे मंजूर करते हुए एसआईटी को अब तक की जांच और इसके आगे हुई जांच की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद कर सौंपने के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट के बाद ही मुख्य आरोपी हाईकोर्ट पूर्व रजिस्टार रिक्रूटमेंट बलविंदर व सुनीता की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी।
मामले की पिछली सुनवाई पर स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने कहा था कि अभी कुछ गिरफ्तारियां होनी बाकी हैं। एसआईटी की दलीलों पर और जांच पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि कोर्ट की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास किया जा रहा है। मामले में आरोपी और उस समय हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार रिक्रूटमेंट बलविंदर कुमार शर्मा और आरोपी सुनीता की तरफ से जमानत दिए जाने की मांग पर एसआईटी की तरफ से कहा गया कि जांच निर्णायक चरण में है, इसलिए जमानत न दी जाए। वीरवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि जिस संस्थान में कोचिंग हो रही थी वह एसएस भारद्वाज का है। भारद्वाज को सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया था और बाद में सीबीआई कोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए सजा सुना दी थी। इस पर एसआईटी की ओर से बताया गया कि इस पक्ष को लेकर भी जांच की गई कि कहीं कोचिंग के दौरान पेपर के सवाल तो नहीं पढ़ाए गए। जांच में सामने आया कि ऐसा कुछ भी नहीं था और संस्थान को एसआईटी ने क्लीन चिट दे दी।
हरियाणा सिविल सर्विसेस जूडिशियल ब्रांच के पेपर लीक मामले की सुनवाई अब हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी समेत पांच जजों की बेंच कर रही है। इससे पहले जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया की तीन जजों की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। आरोपियों की तरफ से मांग की गई थी कि सुनवाई किसी दूसरे बेंच को ट्रांसफर की जाए, कहा कि निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो रही है। वीरवार को इस मामले पर चीफ जस्टिस समेत पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की। शामिल जजों में चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस राजन गुप्ता, जस्टिस अरुण पल्ली व जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया रहे।