पीयू के वीसी के लिए प्रो. टंकेश्वर और बाजपेयी के बीच टक्कर
दोनों को वाइस चांसलर के पद पर कार्य का है अनुभव
169 में से 10 को शार्ट लिस्ट कर लिया जा रहा है इंटरव्यू
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के नए वाइस चांसलर के लिए इस बार प्रोफेसर टंकेश्वर और प्रोफेसर एडीएन बाजपेयी के बीच कड़ी टक्कर होगी। खास बात यह है कि दोनों को वीसी के पद पर कार्य करने का अनुभव है, इसलिए इनकी दावेदारी मजबूत है।
पीयू की ओर से वाइस चांसलर के लिए 169 लोगों ने अप्लाई किया है। इसमें शार्टलिस्ट कर 10 लोगों का इंटरव्यू लिया जा रहा है। यह इंटरव्यू चांसलर की ओर से गठित तीन सदस्यीय कमेटी ले रही है। इसमें सबको मेल के जरिए इंटरव्यू के लिए बुलाया है। वीसी के लिए 17 जुलाई तक इंटरव्यू लिया जाएगा। पीयू के सूत्रों की मानें तो 18 जुलाई को वीसी के नाम की घोषणा हो सकती है।
पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर अरुण ग्रोवर का कार्यकाल 22 जुलाई को खत्म हो जाएगा। उनकी जगह नए वीसी की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया चल रही है। इसमें सबसे अधिक मजबूत दावेदार प्रोफेसर टंकेश्वर और प्रोफेसर एडीएन बाजपेयी हैं। दोनों के अच्छे अनुभव को देखते हुए इन्हीं में से किसी एक का चुनाव किया जा सकता है।
इसलिए चुना जा सकता है इन्हें
प्रो. टंकेश्वर हरियाणा के हिसार की गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर हैं। एक यूनिवर्सिटी का उनके पास अतिरिक्त प्रभार रहा है। वे पीयू के फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर रहे हैं। पीयू कैंपस में वाई फाई की सुविधा उन्होंने शुरू करवाई थी। उनकी दावेदारी इसलिए भी मजबूत मानी जा रही है क्योंकि प्रोफेसर टंकेश्वर के पास शिक्षा और रिसर्च का 25 साल का अनुभव है।
कई बार वीसी रह चुके हैं प्रो. एडीएन बाजपेयी
प्रो. एडीएन बाजपेयी को भी चांसलर कार्यालय से बुलावा भेजा गया है। प्रो. वाजपेयी हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी शिमला और रीवा यूनिवर्सिटी के वीसी रहे हैं। इसके अलावा वे महात्मा गांधी ग्रामोद्योग यूनिवर्सिटी, चित्रकूट के भी वीसी रहे हैं। वे मूल रूप से अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं।
पीयू की दावेदारी कमजोर
पीयू की ओर से अप्लाई करने वाले उम्मीदवारों को अब तक नहीं बुलाया गया है। इसमें पीयू के डीयूआई प्रोफेसर एके भंडारी, प्रोफेसर मीनाक्षी मल्होत्रा, प्रोफेसर रुपिंदर तिवारी, प्रोफेसर दविंदर धवन, प्रोफेसर अमरीक सिंह आहलुवालिया, प्रोफेसर ओपी कटारे समेत कई टीचर्स के नाम आवेदकों के रूप में सामने आ रहे थे। जानकारी के मुताबिक इन्हें इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया है। इसके चलते पीयू की फैकल्टी की दावेदारी कमजोर हो गई है।