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महिला के हत्या मामले में पांच लोग बरी

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हत्या मामले में शिकायतकर्ता नहीं पहुंची कोर्ट, पांचों आरोपी बरी
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- साल 2017 में सेक्टर-20 में महिला की जलकर हुई थी मौत
- पुलिस ने शिकायतकर्ता के पति समेत पांच ससुरालजनों को बनाया था हत्यारोपी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। साल 2017 में महिला रजनी की सेक्टर-20 में जलने से हुई मौत के मामले में शुक्रवार को शिकायतकर्ता महिला कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंची। इस पर एडीजे पूनम आर जोशी की कोर्ट ने पांच हत्यारोपियों को बरी कर दिया। महिला को बार-बार बुलाए जाने पर भी उसके नहीं पहुंचने पर कोर्ट ने उसके वारंट जारी किए थे लेकिन पुलिस महिला को कोर्ट के समक्ष पेश नहीं कर सकी।
5 जनवरी 2017 की रात पुलिस को सेक्टर-20 से महिला को आग लगने की सूचना मिली। पीसीआर कर्मियों ने महिला को जीएमसीएच-32 अस्पताल पहुंचाया। पुलिस टीम ने मौका-ए-वारदात से पेट्रोल की बोतल और माचिस की डिब्बी बरामद की थी। मौके पर पुलिस को महिला अमृता मिली। अमृता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 2014 में उसकी सेक्टर-20 निवासी सरबजीत से शादी हुई। उनके बीच मनमुटाव से वह सेक्टर-52 में मां के पास चली गई। उक्त रात वह अपनी मामी रजनी सहित ससुराल में बेटी का झूला-कम-बेड लेने गई लेकिन वहां पति और ससुरालियों से झगड़े में उन्होंने उसे जलाने की कोशिश की। इसमें वह तो बच गई लेकिन उसके पति और ससुरालियों ने मामी रजनी को आग लगा दी। पुलिस ने अस्पताल में रजनी के बयान दर्ज किए थे। इसके बाद अमृता के पति सरबजीत, ससुर गुरप्रीत सिंह, सास सतविंदर कौर, देवर परमिंदर सिंह और सरबजीत के दोस्त राजेश्वर शर्मा उर्फ मीत पर आईपीसी की धारा 307 व 34 के तहत केस दर्ज किया, लेकिन 15 जनवरी 2017 को रजनी की मौत होने पर दर्ज केस में आईपीसी की धारा-302 को अंकित किया था।
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मृतक के बयानों पर नहीं हो सकी सजा
बचाव पक्ष के वकील यादविंदर संधू ने बताया कि मामले में पुलिस के पास केवल मृत रजनी के बयान थे। अमृता गवाही देने ही नहीं पहुंची। वकील ने बताया कि मृतका के बयान गवाहों और सबूतों से मेल नहीं खाते थे। कहा कि केवल डाइंग डेक्लेरेशन से केस साबित नहीं होता। पुलिस के गवाहों एवं सरबजीत के पड़ोसियों ने कहा था कि घटना के समय सरबजीत और उसका परिवार वहां मौजूद नहीं था। गवाहों ने मौके पर केवल अमृता के होने और उसके नशे में जान पड़ने की बात कही थी। एडवोकेट संधू ने बताया कि पुलिस ने अमृता को आरोपी बनाने के बजाय उसकी ही शिकायत पर केस दर्ज कर लिया।
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