यूटी के कान्ट्रैक्ट टीचर भी डीए के हकदार
- कैट ने डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन के 2016 के जारी आदेश को किया खारिज
- यूटी के सरकारी स्कूलों में तैनात 152 कान्ट्रैक्ट टीचरों की याचिका पर सुनाया फैसला
- कैट बेंच ने समय-समय पर संशोधित होने वाले डीए के लिए भी माना हकदार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने यूटी प्रशासन के शिक्षा विभाग के आदेशों को एक तरफ करते हुए यूटी में तैनात सभी कान्ट्रैक्ट टीचरों को महंगाई भत्ते (डीए) का हकदार माना है। साथ ही इसमें वृद्धि होने पर उसका लाभ भी देने को कहा है। कैट की चंडीगढ़ बेंच ने यह फैसला यूटी के अलग-अलग सरकारी स्कूलों में कान्ट्रैक्ट पर तैनात 152 शिक्षकों की ओर से दायर याचिका पर सुनाया है। इससे पहले शिक्षा विभाग ने कान्ट्रैक्ट टीचरों को डीए देने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ टीचरों ने कैट में केस दायर किया था।
कान्ट्रैक्ट टीचरों की ओर से दलील दी गई थी कि याचिकाकर्ता ने 1998-2002 के बीच कान्ट्रैक्ट टीचर के तौर पर पीजीटी, टीजीटी, जेबीटी और एनटीटी के पद पर ज्वाइन किया था। इसके तहत उन्हें निश्चित मासिक सैलरी दिया जाना तय हुआ था।
हालांकि, हर साल एक जनवरी और एक जुलाई को संशोधित होने वाले डीए का लाभ उन्हें नहीं दिया गया, जो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के खिलाफ था। यूटी प्रशासन की ओर से बेसिक सैलरी के साथ डीए देने से इनकार करना कानूनी तौर पर गलत है। अपने फैसले में कैट बेंच ने कान्ट्रैक्ट टीचरों को रेगुलर कर्मियों की तरह बेसिक सैलरी के साथ समय-समय पर संशोधित डीए देना का हकदार माना है। चंडीगढ़ बेंच ने अपने आदेश में डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन के 10 फरवरी 2016 को जारी आदेश को रद्द करते हुए सभी कान्ट्रैक्ट टीचरों को बेसिक सैलरी के साथ समय-समय पर संशोधित डीए देने के आदेश दिए हैं।