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इंडो-स् विस ट्रेनिंग सेंटर की 140 सीटों के लिए 1085 छात्रों ने दी परीक्षा

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इंडो-स्विस ट्रेनिंग सेंटर की 140 सीटों के लिए 1085 ने दी परीक्षा
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रविवार को आयोजित हुई परीक्षा, डिप्लोमा कोर्सेज के लिए काफी क्रेज

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सेक्टर-30 स्थित सीएसआईआर-सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स आर्गनाइजेशन के अंतर्गत आने वाले इंडो स्विस ट्रेनिंग सेंटर का एंट्रेस टेस्ट हुआ। कुल 140 सीट के लिए 1085 कैंडिडेट्स ने परीक्षा दी। आईएसटीसी इलेक्ट्रानिक्स व मेक्निकल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा कोर्स की 55 सीटे हैं, जबकि मेकाट्रोनिक्स एंड इंडस्ट्रियल आटोमेशन और डाई एंड माउल्ड मेकिंग के एडवांस डिप्लोमा कोर्स के लिए 15-15 सीटे हैं। प्रिंसिपल नरेंद्र सिंह जसवाल ने बताया कि डिप्लोमा कोर्स करने के बाद स्टूडेंट का भविष्य सुरक्षित है। पासिंग आउट बैच के सभी स्टूडेंटों को बड़ी कंपनियों में अच्छी नौकरी मिल चुकी है। इन कंपनियों में टाइटन, बजाज, एटल्स, हेवैल्स, हीरो, सैम्संग सहित अन्य शामिल हैं।
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सीएसआईओ के डायरेक्टर प्रो. आरके सिन्हा ने बताया कि पिछले कुछ समय से तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में कमी आई है, मगर आईएसटीसी में लगातार आवेदन करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि आईएसटीसी की उच्च श्रेणी की ट्रेनिंग है। यहां पर प्रैक्टिक्ल नॉलेज के साथ समय के मांग के मुताबिक स्टूडेंट को पढ़ाया और सिखाया जाता है। आईएसटीसी की स्थापना 1963 में स्विस फाउंडेशन की मदद से की गई थी। उस समय भारत का उद्योग नवजात काल में था। उद्योगों की मशीनों के निर्माण, संचालन और उनके रखरखाव के लिए काफी संख्या में कुशल कारीगरों की जरूरत थी। इन जरूरतों को ध्यान में इसकी स्थापना की गई। यहां से निकले कई छात्र विश्व स्तर पर बस गए हैं। कई तो ऐसे हैं, जो भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में सफल उद्यमी हैं।
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