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बजट 2019: महिलाओं की उम्मीदों पर फिरा पानी, बोलीं- किताबें और श्रृंगार का सामान ही महंगा कर दिया

Sat, 06 Jul 2019 10:16 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से वीरवार को पढ़ा गया बजट चंडीगढ़ की महिलाओं के लिए काफी निराशाजनक रहा। महिलाओं क ी मानें तो उन्हें उम्मीद थी कि वित्त मंत्री महिला होने के नाते महिलाओं के हित में सोचेंगी, लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। मुद्रा स्कीम में 1 लाख तक के लोन का लाभ बिजनेस वुमेन उठा सकती हैं। गृहणी और प्राइवेट नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए यह बजट किस काम का?
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बजट में पछतावा के सिवाय कुछ नहीं
इस बार का बजट महिलाओं से लेकर व्यापारियों सबके लिए शून्य रहा है। बजट में न तो स्टडेंट्स का लाभ हुआ न व्यापारियों का और न ही मध्यम वर्ग के लोगों का। अब तो लोगों को अपने वोट का गलत इस्तेमाल करने का पछतावा हो रहा है।
-आशा कालौं, जिला कार्डिनेटर, लांयस क्लब

आम जनता को सिर्फ निराशा हाथ लगी
पूर्व पार्षद सतिंदर धवन ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि इनकम टैक्स में थोड़ी राहत मिलेगी। लेकिन इनकम टैक्स कम करने की बजाय पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा में इस्तेमाल की जा रही चीजें भी महंगी हो गई हैं। इसलिए इस बार का बजट बहुत निराशाजनक है। इससे आम जनता को कोई लाभ नहीं।
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-सतिंदर धवन, पूर्व पार्षद

किताबें महंगी कर दीं, बच्चे कैसे पढ़ाएंगे
गृहणी को हमेशा उम्मीद रहती है कि ग्रोसरी और बच्चों की पढाई का खर्च कम रहे तो वह कुछ बचत कर सके। लेकिन सरकार ने जब किताबें ही महंगी कर दी तो मध्यवर्ग के लोग अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएगा। इस बार का बजट मेरी नजर में सबसे घटिया बजट है।
- सुमन अहुजा, गृहणी







 

नारी को ‘नारायणी’ बनाकर उड़ाया मजाक
निर्मला सीतारमण ने नारी को नारायणी कहकर महिलाओं का एकतरफा मजाक उड़ाया है। यदि पेट्रोल- डीजल महंगा होगा तो किराया बढ़ेगा और लोगों के खर्चे भी बढेंगे। ऐसे में महिला पति द्वारा दिए गए खर्च से कै से घर खर्च पूरा करेगी और कै से बचत करेगी।
- आंचल, सेक्टर 22 निवासी

मध्यम वर्ग पर सबसे अधिक मार
हमेशा की तरह इस बार का बजट केवल गरीबों और अमीरों के लिए रहा। मध्यवर्ग के लिए इस बार के बजट में कुछ खास नहीं था। इस बार भी मध्यवर्ग के लोग को ही सबसे अधिक मार पड़ी है, क्योंकि न तो उन्हें इनकम टैक्स में राहत मिली है और न ही घर खर्च कम हुआ है।
-रीना, गृहणी

बजट ने तैयार किया नया रोडमैप
इस बजट ने अगले कुछ वर्षो में 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का एक रोड मैप तैयार किया है, जो प्रशंसनीय है। बजट-2019 के अंतर्गत शानिल नारि तू नारायणी, जल जीवन दर्शाता है कि सबका साथ सबका विकास नारा आज सबका सम्मान सबका विश्वास की ओर बढ़ रहा है।
-रीघु भारत, गृहणी

5 हजार तक के ओवड्राफ्ट का क्या लाभ, बजट बढ़े
5 हजार रुपये ओवर ड्राफ्ट से अचार, चटनी जैसे छोटे-मोटे बिजनेस करने वाली महिलाओं को लाभ हो सकता है। लेकिन बड़े स्तर पर काम करने वाली महिलाओं के लिए यह किसी काम का नहीं। कांग्रेस के समय में 15 हजार रुपये तक का ओवरड्राफ्ट था तब भी बिजनेस वूमेन असंतुष्ट थी तो अब क्या होगा। सरकार को महिलाओं के लिए बजट बढ़ाना चाहिए।
- बल्ली एन.बी सिंह, इंटीरियर डिजाइनर

 
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औरतों का श्रृंगार हुआ महंगा
औरतों को गहने पहनना और मेकअप करना सबसे अधिक पसंद है। लेकिन बजट में मेकअप के साथ साथ सोना भी महंगा कर दिया है। ऐसे में महिलाएं न तो सोना खरीद सकती है और न ही ब्यूटी प्रोडक्ट। इसके अलावा न ही गृहणी अपना घर खर्च सुधार कर सकती है।
-शालू, मॉडल

महिला वित्त मंत्री के बजट पढ़ते देखना सुखद अहसास
मुझे खुशी है कि इस बार महिला वित्त मंत्री ने बजट पढ़ा। इसके अलावा लोकसभा में 78 महिला सांसद देखकर लग रहा है कि सच में महिला सशक्त हो रही है। बस अब जरूरत है तो समानता की। मध्यम वर्ग के लिए मुझे बजट ठीक ही लगा।
-सुषमा मल्होत्रा, सेक्रे टरी, ट्यूजडे लेडीज क्लब

देश को एजुकेशन हब बनाने की बात सराहनीय प्रयास
देश को एजुकेशन हब बनाने की बात मुझे सबसे अच्छी लगी कि देश के बच्चें दूसरे देशों में पढने जाने की बजाय अपने ही देश में पढ़ाई करेंगे और यहीं सेटल होंगे। मध्यवर्ग को राहत मिलनी चाहिए थी जबकि अमीरों के लिए निर्धारित किए गए टैक्स में वह बिल्कुल संतुष्ट हूं।
-शारदा कटपालिया, प्रेजीडेंट पंचकूला लेडीज क्लब

दाल-पेट्रोल महंगा करके कैसा विकास
सरकार सबका साथ सबका विकास के नारे लगाती है, लेकिन दाल और पेट्रोल-डीजल महंगा करकैसा विकास। महिलाओं को लग रहा था महिला वित्त मंत्री उनके लिए बजट में कुछ खास लेकर आएंगी। लेकिन इस बार का बजट केवल कामकाजी महिलाओं के लिए ही खुशी लेकर आया है।
-पूनम सहगल, प्रेजीडेंट रेनबो लेडीज क्लब

इस बार भी रोजगार प्रयास तक ही सिमटा
बजट में 2024 तक हर घर में पानी, बिजली पहुंचाने पर तो बातचीत की गई, लेकिन रोजगार इस बार भी केवल प्रयास तक ही सिमट कर रह गया। ऐसे में इस बार के बजट ने तो महिलाओं को लाभ हुआ और न ही युवा वर्ग को। लेदर के महंगे होने से मुझे खुशी है क्योंकि यह पशुओं को मारकर बनाया जाता है।
-निर्मल जसवाल, साहित्यकार
 
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