जिस घर में प्रसिद्ध रंगकर्मी व नाटककार गुरशरण सिंह ने अंतिम सांस ली, वह आज गैलरी बन गया। व्हीलचेयर पर बैठीं उनकी पत्नी कैलाश कौर ने कांपते हाथों से फीता काटकर इसका उद्घाटन किया। इस दौरान उनकी आंखें आंसुओं से तर हो गईं। पूरा जीवनचक्र मानो उनकी आंखों के सामने से गुजर गया। रुंधे गले से इतना ही कह पाईं-यह पल उनके लिए किसी सुखद सपने जैसा है। दोनों बेटियां डॉ. नवशरण कौर और डॉ. अरीत कौर भी साथ थीं। इस मौके पर वे भी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही थीं।
पंजाब के प्रसिद्ध रंगकर्मी और नाटककार गुरशरण सिंह की याद में उनके घर के दो कमरों को गैलरी का रूप दिया गया है। गुरशरण सिंह 1989 से 2011 अपनी जिंदगी के आखिरी पल तक यहीं रहे। सुचेतक रंगमंच की डायरेक्टर और प्रसिद्ध रंगकर्मी अनीता शब्दीश ने इस गैलरी को सजाया है। पहले यह गैलरी मोहाली में थी। लेकिन अब इसे गुरशरण सिंह के बंद पड़े घर में बनाया गया है। इस मकान के दोनों कमराें में उनकी जीवन, परिवार, थिएटर से जुड़ी तस्वीरें दीवारों पर सजाई हैं।
इस मौके पर पंजाबी फिल्मों से जुड़ीं कलाकार जसवंत दमन, टैगोर थियेटर के पूर्व डायरेक्टर बलकार सिद्धू, प्रसिद्ध रंगकर्मी सुदेश शर्मा, सीसीपीसीआर की चेयरपर्सन हरजिंदर कौर समेत अन्य युवा कलाकार भी मौजूद रहे।
गाउन हाथाें में लेते ही भावुक हुईं कैलाश कौर
गुरशरण सिंह अपने आखिरी दिनाें में सेक्टर 43 स्थित इसी घर में रहे। दूसरे कमरे में उनका बेड लगा है। इसके पीछे उनकी बड़ी सी तस्वीर लगी है। सामने दरवाजे पर उनका महरून रंग वह गाउन लगा है, जिसे वह ‘मलक भागो’ का रोल निभाते हुए पहनतेे थे। कैलाश कौर की नजर गाउन पर पड़ी तो वह उसे हाथाें में लेकर प्यार से सहलाने लगीं।
इसी कमरे में गुरशरण सिंह की व्हीलचेयर और सहारा लेकर चलने वाली छड़ी है। साथ ही वह बर्तन भी हैं, जिसमें उनकी अस्थियों को प्रवाहित किया गया था। इसी बेडरूम में उनके कुर्ता, पायजामा और चाय की वह केतली भी है, जिसमें वह रोजाना चाया पीते थे।
लोगाें के लिए निशुल्क खुली रहेगी गैलरी
गैलरी के पहले कमरे में उनके रंगकर्मी रहते वक्त की तस्वीरें, बच्चाें, पत्नी के साथ नाटक मंचन की तस्वीरें लगाई गई हैं। इनकी संख्या 34 के करीब है। रंगकर्मी अनीता शब्दीश ने बताया कि यह गैलरी सबके लिए ओपन रहेगी और इसे देखने आने वालों के लिए कोई फीस नहीं रखी गई हैं। यहां पर एक विजिटर बुक भी रखी गई है।
पत्नी ने कहा बेहद सुखद क्षण
गैलरी देखने पहुंची पत्नी कैलाश कौर पूरे समय भावुक दिखाई दीं। बोलीं- मैंने सोचा भी नहीं था कि मेरे पति की याद को इतने बेहतर तरीके से गैलरी में संजोकर रखा जाएगा। इस गैलरी को देखना मेरे लिए सुखद क्षण जैसा है।
बेटी डॉ. अरीत कौर ने बताया कि मेरे पिता इसी घर में आखिरी समय तक रहे। काफी समय से यह घर बंद पड़ा था। किसी सरकार ने उनकी याद में गैलरी बनाने की बात तक नहीं सोची थी। हमने निर्णय लिया कि क्याें ने बंद पड़े इस घर को पिता जी की यादगार गैलरी में बदल दिया जाए। यह दिन हमारे लिए बेहद खास है।