चंडीगढ़। सफाई कर्मचारियों के घर बैठकर सैलरी लेने के मामले में नया मोड़ आ गया है। लगभग 400 कर्मचारियों के बारे में जानकारी नहीं मिली है कि वह फील्ड में हैं या नहीं। नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने अधिकारियों से साफ-साफ कहा है कि कर्मचारी कहां हैं, खोज कर लाओ नहीं तो जवाब दो कि आखिर बिना मॉनीटरिंग कर्मचारियों के खाते में रुपये कैसे पहुंच गए।
कमिश्नर ने बताया कि लगभग 600 कर्मचारी बिना काम पर आए सैलरी ले रहे थे। इनमें से 200 कर्मचारियों को वापस बुला लिया गया है, लेकिन 400 कर्मचारियों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही है। जांच के बाद तीन बातें सामने आई हैं कि कुछ कर्मचारी घर बैठकर सैलरी ले रहे थे, कुछ अधिकारियों और काउंसिलर के घर काम कर रहे थे।
वापस लौटे कर्मचारियों को सेक्टर 26 मंडी में लगाया
जो लोग घर बैठकर या अधिकारियों के घर काम कर सैलरी ले रहे थे, उनमें से ज्यादातर कर्मचारियों को सेक्टर 26 स्थित मंडी में काम पर लगा दिया गया है। शेष को अन्य जगह काम दिया गया है ताकि सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो सके। उधर, कमिश्नर ने यूनियन के पदाधिकारियों से कहा है कि अब काम करना होगा। बैठकर कोई सैलरी नहीं लेगा।
बैंक अकाउंट नहीं कराए सीज, वहीं से मिलेगी जानकारी
कर्मचारियों की सैलरी उनके अकाउंट में आती थी, लेकिन निगम ने अब तक उनके खाते सीज नहीं कराए हैं। क्यों कि उनके खातों में ही सैलरी आती थी। खाते के लिए कर्मचारी के पूरे दस्तावेज देने होते हैं। वहीं, यदि कर्मचारी रुपये नहीं ले रहा तो उसकी जगह कौन रुपये निकाल रहा था इसकी भी जानकारी बैंक से ही मिल सकेगी।
अधिकारियों के खिलाफ जांच की तैयारी
कमिश्नर ने कहा कि हैरानीजनक है कि इतने लोग कागजों में सैलरी ले रहे थे, लेकिन अधिकारियों को पता नहीं चला। स्पष्ट है कि कहीं न कहीं अधिकारियों की मिलीभगत रही है। वहीं, कुछ लोग काउंसिलर व अधिकारियों के यहां लगे थे, जो सेनेटरी इंस्पेक्टर की चालबाजी रही है। इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिलेंगे। जो लोग इसमें शामिल होंगे उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।