पीयू के स्टूडेंट सेंटर के टॉप फ्लोर पर स्थित इंडिया कॉफी हाउस अपने आखिरी दिन खूब गुलजार रहा। पुराने ग्राहकों के साथ विवि से पढ़ाई कर चुके पुराने स्टूडेंट भी बड़ी संख्या में कॉफी हाउस पहुंचे और अपनी यादें ताजा कीं। कई लोग तो वेटरों से पुराना नाता जोड़ते दिखे। दिनभर मिलने-जुलने का क्रम चलता रहा। अब सोमवार को पीयू प्रशासन कॉफी हाउस के ओनर सीटी कुरुविला उर्फ जॉय को सम्मानित कर उन्हें विदाई देगा। जानकारों का कहना है कि यदि पीयू प्रशासन को उन्हें रोकना था तो सुविधाएं बढ़ानी चाहिए थी और विदाई का ख्याल अधिकारियों को नहीं आना चाहिए था।
बताया जा रहा है कि जॉय की विदाई के बाद कॉफी हाउस में साउथ इंडियन फूड ही सभी को मिलेगा। साथ ही स्वाद भी वैसा ही रहेगा। इसके लिए पीयू प्रशासन मेहनत कर रहा है। वह ऐसा चेहरा या ओनर ढूंढ रहा है जिससे जॉय की कमी को पूरा किया जा सके। साथ ही कॉफी हाउस से पुराना जुड़ाव बरकरार रहे। पीयू परिसर में साउथ इंडियन फूड बेचने वाले किसी ओनर को प्राथमिकता दी जा सकती है।
इंडिया कॉफी हाउस में रविवार को भी काफी भीड़ थी लेकिन ओनर जॉय उदास थे। उन्हें किसी के जरिए पता चला कि अब समय नहीं बढ़ने वाला। यही कारण है कि विदाई का दिन भी सोमवार तय कर दिया गया है। जब विदाई हो जाएगी तो फिर यहां रहना भी ठीक नहीं। इसके कारण वह अपना सामान समेट रहे हैं। कॉफी हाउस रविवार देर शाम तक गुलजार रहा। आखिरी दिन वेटर भी मायूस नजर आए।
1972 में यहां 60 पैसे में मिलता था डोसा
जीसीजी-42 से सेवानिवृत्त डीन प्रो. केपीएस शांते अपने दोस्तों सतीश कुमार, राजकुमार, राजीव और बलविंदर के साथ रविवार को कॉफी हाउस पहुंचे। प्रो. शांते ने बताया कि जब वह डीएवी कॉलेज में पढ़ते थे तो यहां डोसा खाने आते थे। वर्ष 1972 में यहां 60 पैसे का डोसा मिलता था। चाय भी इतने ही पैसे में तीन कप मिल जाती थी। वेटर को 20 पैसे टिप में देते थे तो वो सलाम करते थे। उन्हें बड़ी खुशी मिलती थी। दिन में किसी भी समय वह यहां पहुंच जाते थे और खूब आनंद उठाते थे।
आज भी इस कॉफी हाउस के हर खाने का स्वाद वही है। गुणवत्ता में कोई कमी नहीं आई है। वेटर उन्नमी, डोमेनिक से पुराने संबंध हैं। प्रो. केपीएस शांते कहते हैं कि पीयू प्रशासन को समय रहते इस हेरिटेज भवन का हिस्सा रहे कॉफी हाउस को देखना चाहिए था। सुविधाएं देते और किराया कुछ कम करते तो यह दिन नहीं देखना पड़ता। इंडिया कॉफी हाउस पीयू की शान है, इसे रोकने के लिए प्रयास होने चाहिए।
अरविंद और मोनिका की प्रेम कहानी का गवाह है कॉफी
पंचकूला सेक्टर चार निवासी अरविंद और मोनिका की प्रेम कहानी इसी कॉफी हाउस में वर्ष 1994 में पढ़ाई के दौरान शुरू हुई। दोनों ही लॉ विभाग के स्टूडेंट्स रहे हैं। दोनों कॉफी हाउस पहुंचे थे। मोनिका ने अरविंद को यहीं प्रपोज किया लेकिन अरविंद ने उनका प्रपोजल स्वीकार नहीं किया। फिर दोस्तों के साथ यहां डोसा खाया और फिर दोनों की प्रेम कहानी शुरू हो गई। जिस टेबल पर शुरू में बैठकर डोसा खाया था उसी टेबल पर हमेशा बैठते रहे हैं।
कहते हैं कि कॉफी हाउस बंद होने की सूचना मिली तो शनिवार को यहां पहुंचे लेकिन तब तक कॉफी हाउस बंद हो चुका था। इसलिए रविवार को आए हैं। यहां का डोसा व उत्पम सालों से खाते आ रहे हैं। स्वाद वही पुराना है। हेरिटेज भवन का हिस्सा है यह काफी हाउस, इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए। पीयू प्रशासन इसके लिए कुछ छूट ऑनर को दे ताकि वह घाटे से उबर पाएं।
यहां का स्वाद हमेशा याद रहेगा : डॉ. भारत
पीयू में यूआईएलएस के प्रोफेसर डॉ. भारत भी परिवार के साथ रविवार को कॉफी हाउस पहुंचे। हाउस का आखिरी दिन होने के कारण उन्होंने परिवार के हर सदस्य को मेन्यू के हर आइटम का स्वाद चखाया। कहते हैं कि यहां का स्वाद याद आता रहेगा। डोसा, सांभर, उत्पम आदि का स्वाद बेजोड़ है, जो मिलना मुश्किल है।
ये थीं काफी हाउस ओनर की मांगें
- हर साल बढ़ाए जा रहे किराये में रियायत मिले
- बेचे जा रहे आइटमों के रेट बढ़ाने की अनुमति दी जाए
- कामर्शियल दरों पर दी जा रही बिजली में छूट मिले