चंडीगढ़। सीएसआईआर-केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ) में शुक्रवार को इंडो-स्विस ट्रेनिंग सेंटर का 54वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नई दिल्ली स्थित स्विट्जरलैंड दूतावास में वरिष्ठ सलाहकार डॉ. इंद्रनील घोष मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पास होने वाले स्टूडेंट्स को जीवन में आने वाले बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए। डॉ. इंद्रनील ने बताया कि सीएसआईओ उनके लिए बेहद खास है, क्योंकि उन्होंने अपना पोस्ट डॉक्टरल शोध सीएसआईआर की एक प्रयोगशाला से ही किया था। डॉ. इंद्रनील ग्रेजुएशन करने वाली छात्राओं की संख्या में वृद्धि देखकर खुश थे लेकिन उन्होंने कहा कि तकनीकी अध्ययन का चुनाव करने वाली लड़कियों की संख्या में सुधार की आवश्यकता है।
सीएसआईआर-सीएसआईओ के डायरेक्टर प्रोफेसर आरके सिन्हा ने इंडो-स्विस ट्रेनिंग सेंटर (आईएसटीसी) की गतिविधियों पर प्रकाश डाला और मुख्य अतिथि का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अक्सर छात्रों को लगता है कि दीक्षांत समारोह के समय कड़ी मेहनत के दिन खत्म हो जाते हैं लेकिन स्टूडेंट्स के लिए यहां से एक नया अध्याय शुरू होने वाला है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा एक आजीवन प्रक्रिया है।
ग्रेजुएट स्टूडेंट्स को डायरेक्टर आरके सिन्हा ने डिप्लोमा और एडवांस डिप्लोमा प्रदान किए जबकि मुख्य अतिथि डॉ. इंद्रनील घोष ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कार और पदक प्रदान किए। प्रशिक्षण केंद्र की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए आईएसटीसी के उप-प्रधान नरेंद्र सिंह जस्सल ने बताया कि स्किल इंडिया इनिशिएटिव की विभिन्न प्रतियोगिताओं में विभिन्न प्रतिष्ठित पुरस्कारों को प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि लगभग सभी छात्रों को देश की बड़ी और नामी कंपनियों में प्लेसमेंट मिल चुकी है।
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल और सिल्वर मेडल प्राप्त करने वाले स्टूडेंट्स
अनुज गर्ग (गोल्ड मेडल)
प्रदीप कुमार (सिल्वर मेडल)
मेकेनिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल और सिल्वर मेडल प्राप्त करने वाले स्टूडेंट्स
कुलजीत (गोल्ड मेडल)
राम गोपाल (सिल्वर मेडल)