चंडीगढ़। नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रशासन और निगम के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में धरना दिया। यह धरना फेडरेशन ऑफ यूटी इंप्लाइज एंड वर्कर्स चंडीगढ़ के आह्वान पर हुआ। कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी की।
इस धरने में बिजली, पानी, सड़क, बागवानी, भारतीय बाल कल्याण परिषद, सफाई कर्मचारी, सिटको, हाउसिंग बोर्ड, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य विभागों के कर्मचारी भी शामिल थे। महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुई। आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती जेम पोर्टल से करने की बजाय पंजाब व दिल्ली की तर्ज पर सीधे विभागों के अधीन कर पक्के कर्मचारियों के बराबर वेतन व अन्य सहूलियतें देने की मांग उठाई गई।
प्रमुख मांगों में डेलीवेज, वर्कचार्ज, कांट्रैक्ट व आउटसोर्स पर रखे कर्मचारियों को पक्का करने, बिजली, पानी आदि सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं का निजीकरण बंद करने तथा स्थायी काम पर आउटर्सोसिंग व ठेकेदारी खत्म करना प्रमुख हैं। साथ ही मजदूर - कर्मचारियों के हित में बने श्रम कानूनों में बदलाव न करने, सभी विभागों में खाली पड़े पद पर नियमित भर्ती करने, भर्ती व प्रमोशन के नियमों में संशोधन करने, 5 प्रतिशत सीलिंग खत्म कर पंजाब के आधार पर मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी देने, 4 अक्तूबर 2010 को ड्रा में सफल कर्मचारियों को शीघ्र मकान देने की मांगें उठाई गईं। धरने को फेडरेशन के प्रधान रघबीर चंद्र, महासचिव गोपाल दत्त जोशी के अलावा राजेंद्र कटोच, भीमसेन, विजय सिंह, ध्यान सिंह, हरकेश चंद, अमरीक सिंह, रेखा शर्मा, विजेंद्र कुमार, विश्राम, राम बहादुर व अन्य सहयोगी संगठनों के नेताओं विपिन शेर सिंह, अशोक कुमार, गुरदीप सिंह व सीटू के प्रधान कुलदीप सिंह, राम सरूप, मनमोहन सिंह, काका सिंह ने संबोधित किया।
यह पास हुआ प्रस्ताव
धरने में विशेष प्रस्ताव पास कर सफाई कर्मचारी नेताओं पर की जा रही बदले की कार्रवाई शीघ्र बंद करने की मांग की गई। ट्रेड यूनियन के अधिकारों पर हमले की निंदा की और सस्पेंड किए गए यूनियन के प्रधान को शीघ्र बहाल करने की मांग भी की गई।