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जूनियर को एचओडी बनाने पर मेडिकल कालेज के प्रोफेसर ने लिखा पत्र

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चंडीगढ़। सेक्टर 32 स्थित मेडिकल कालेज के आई डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डा. सुदेश कुमार आर्य ने चंडीगढ़ प्रशासन को पत्र लिखकर यूपीएससी की उस सिफारिश का विरोध जताया है, जिसमें उनके जूनियर प्रोफेसर को एचओडी बनाने की बात कही गई है। प्रशासन को लिखे अपने पत्र में उन्होंने आवश्यक कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि यह मामला जातिगत भेदभाव का भी हो सकता है, क्योंकि वे अनुसूचित जाति के हैं। आर्य का कहना है कि 1 अक्तूबर 1997 को यूपीएससी के तहत उन्होंने संस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर एंट्री की थी। 1 मार्च 2005 को कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के माध्यम से प्रोफेसर के रूप में नामित हुए। इसके बाद 20 जून, 2017 से वह प्रोफेसर और विभाग के प्रमुख बने। डा. सुरेश के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने पत्र में लिखा है कि वह 23 मार्च, 1999 को सीनियर लेक्चरार के पद नियुक्त हुए। सीएएस के माध्यम से 23 जनवरी 2012 को प्रोफेसर नियुक्त हुए।
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वे अपने पत्र में लिखते हैं कि अगली प्रमोशन के लिए 29 मई 2019 को यूपीएससी ने बातचीत के लिए दो लोगों को बुलाया। इनमें एक वे थे और दूसरे डा. सुरेश। दोनों को पदोन्नति के लिए योग्य पाया गया। उन्होंने बताया कि उन्हें पता चला है कि यूपीएससी डा. सुरेश कुमार के नाम को पोस्ट और विभागाध्यक्ष के नाम को आगे बढ़ा रही है, जबकि उनके दावे की अनदेखी की जा रही है। वे डा. सुरेश से सीनियर हैं और उनके पांच साल के कामों की अनदेखी की गई है। यूपीएससी जानबूझकर कई सारे दावों की अनदेखी कर रही है। यदि उनके जूनियर को प्रमोट कर विभागाध्यक्ष बनाया जाता है तो पंजाब सिविल सर्विस रूल्स 1984 की अनदेखी होगी। उनका कहना है कि जब तक इस मामले की जांच नहीं होती है तब तक डा. सुरेश की ज्वाइनिंग को रोका जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि उनके किए गए कार्यों की अनदेखी इसलिए की जा रही है, क्योंकि वे अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते हैं।
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