चंडीगढ़। अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश बलबीर सिंह की अदालत ने पंजाब की डीएसपी राका गेरा को आर्म्स एक्ट के एक मामले में बरी कर दिया है। 24 जुलाई, 2011 को चंडीगढ़ पुलिस ने आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत एक एफआईआर दर्ज की थी। इसके मुताबिक सीबीआई की छापेमारी के दौरान सेक्टर 15 में उनके आवास से हथियार मिले थे। उसके बाद आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। उस दौरान उनके आवास से एक .32 बोर जर्मन रिवॉल्वर, एक डबल बैरल गन के साथ कई कारतूस भी मिले थे।
6 मार्च, 2014 को उन पर आर्म्स एक्ट के तहत आरोप तय किए गए। 18 फरवरी को सिविल जज की अदालत ने राका गेरा को आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया और एक साल की सजा सुनाई। सजा के खिलाफ जिला और सत्र न्यायाधीश की अदालत में आपराधिक अपील दायर की गई। तर्क दिया गया कि छापेमारी और वसूली के समय उसके पास हथियारों का वैध लाइसेंस था। हथियारों और गोला-बारूद की वसूली के मामले को अभियोजन पक्ष साबित करने में विफल रहा है और पुलिस अधिकारियों के बयान में काफी कंफ्यूजन है। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राका गेरा को बरी कर दिया।