मांगें मनवाने के लिए एनएचएम कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
- कर्मचारी बोले, सरकार मांग नहीं मानेगी तो करेंगे आमरण अनशन
- एनएचएम कर्मचारियों ने सिविल सर्जन पंचकूला को ज्ञापन सौंपा
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। जिले के एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को भी जारी रही। कर्मचारियों ने डीसी ऑफिस, जिला अस्पताल के सीएमओ को ज्ञापन देकर रेगुलर करने की मांग की। सोमवार को हड़ताल की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष मुनीर अहमद ने की। कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में एनएचएम कर्मचारी अगले 72 घंटे दिन रात धरने पर बैठे रहेंगे। मंगलवार को भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार हमारी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं करती है तो जल्द ही आमरण अनशन पर जाने को मजबूर होंगे। इसी सिलसिले में सोमवार को पहले एनएचएम कर्मचारियों ने सिविल सर्जन पंचकूला को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद सभी एनएचएम कर्मचारी रोष मार्च करते हुए माजरी चौक से होते हुए डीसी ऑफिस पहुंचे। डीसी की ओर से तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
हरियाणा प्रदेश में एनएचएम कर्मचारी सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदेशभर में आम जनता परेशान है। मरीजों को अपने इलाज के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है। हड़ताल स्थल पर इंटक जिला महिला प्रदेश अध्यक्ष पंचकूला बबीता तलवार अपने साथियों के साथ पहुंचीं। रोष मार्च में भी वो साथ रहीं। कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इंटक यूनियन आप के साथ है। सरकार जल्द एनएचएम कर्मचारियों की मांगों को पूरा करे ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से चल सकें। वहीं स्वास्थ्य कर्मचारी संघ हरियाणा की ओर से रामपाल मलिक भी रोष मार्च में शामिल रहे। कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ज्यादा समय तक आपके आंदोलन को झेल नहीं पाएगी और जल्द ही आपकी मांगों को मानेगी। पूरे प्रदेश में अब तक 4000 से अधिक एनएचएम कर्मचारियों को टर्मिनेट किया जा चुका है। जिला पंचकूला में ही 32 कर्मचारियों को टर्मिनेट किया गया है। कर्मचारियों के जोश में कोई कमी नहीं आई है। एनएचएम कर्मचारियों की मुख्य मांगें सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण, सातवां वेतन आयोग लागू करना, सेवा नियम संशोधन व एक साल से लंबित पड़ी मांगें पूरी करना है। एक साल में अधिकारियों व सरकार से 17 बार वार्ता हो चुकी है लेकिन हर बार सिवाय झूठे आश्वासन के कर्मचारियों को कुछ नहीं मिला है। इसलिए कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ा। अधिकारी अभी भी सरकार के पास झूठी रिपोर्ट पेश कर रहे हैं और सच्चाई ये है कि पूरे प्रदेश में जनता स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बहुत दुखी है।