19 फरवरी को संसद पर होगा पीपुल्स मार्च
स्कूल टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया की खंड पंचकूला ने लिया फैसला
- सेव एजूकेशन सेव कैंपस और सेव नेशन मिशन में सैकड़ों अध्यापक लेंगे भाग
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। जन शिक्षा को बचाने के लिए 19 फरवरी को सेव एजूकेशन, सेव कैंपस एंड सेव द नेशन के नारे के साथ संसद पर होने वाले पीपुल्स मार्च में पंचकूला से भी सैकड़ों शिक्षक भाग लेंगे। यह निर्णय हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ संबंधित सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा एवं स्कूल टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया की खंड पंचकूला कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। यह बैठक खंड प्रधान संजीव कादियान की अध्यक्षता में यवनिका पार्क में मंगलवार को हुई। बैठक का संचालन खंड सचिव राकेश कुमार ने किया। अध्यापक संघ के जिला प्रधान राजेंद्र पाल ने कहा कि इस मार्च में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारी भी भाग लेंगे। स्कूल व कॉलेजों के छात्र भी इस मार्च में भाग लेंगे। जन शिक्षा पर सरकार द्वारा लगातार जारी हमलों के खिलाफ पूरे देश में जन शिक्षा बचाने के प्रयास में लगे सभी संगठन एकजुट होकर देश बचाने के लिए जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 19 फरवरी को संसद पर प्रदर्शन करेंगे और यदि फिर भी सरकार अपने जनविरोधी कदमों को नहीं रोकती है तो संघर्ष और तेज किया जाएगा। राज्य सचिव लेक सिंह ने बताया कि इस वर्ष अध्यापक संघ के गठन को 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। वर्षभर स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में अनेकों कार्यक्रम संगठन द्वारा चलाए जाएंगे। इस दौरान विचार गोष्ठियों, कार्यशाला, सेमिनार एवं कन्वेंशन आदि का आयोजन विभिन्न खंड, जिला व राज्य स्तर पर किया जाएगा। अध्यापक आंदोलन पर चार पेज के ऐतिहासिक पर्चे के साथ-साथ पुस्तकों का प्रकाशन किया जाएगा। इस बैठक में जिला सहसचिव पीतांबर मोहन, प्रचार सचिव राजेंद्र सिंह, खंड उपप्रधान सत्येंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष विजय नैन, कुलदीप भुक्कल सहित सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।
21 फरवरी को होगा संसद मार्च
जिला सचिव विजय पाल ने बताया कि नई पेंशन स्कीम बंद करके पुरानी पेंशन स्कीम लागू करवाने व सभी प्रकार के कच्चे शिक्षकों, कर्मचारियों को नियमित करवाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी फेडरेशन के आह्वान पर 21 फरवरी को संसद मार्च में भी अध्यापक बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। खंड प्रधान संजीत कादियान ने कहा कि सरकार ने बजट में न तो युवाओं को स्थायी रोजगार के बारे में कुछ कहा और न ही समान काम समान वेतनमान के बारे में कुछ कहा। यह सिर्फ एक जुमला बजट है।