रोहतक और नोएडा के ध्यानार्थ.............
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एक बार गवाही देने के बाद मुकर गया था खट्टा सिंह
राम रहीम घूम रहा था खुलेआम, परिवार को था खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड के मुख्य गवाह और डेरा प्रमुख राम रहीम के पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह एक बार मामले में अपने बयान से मुकर गए थे। राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में सजा होने के बाद वह फिर सामने आए और सीबीआई कोर्ट में अपने बयान दर्ज करवाते हुए पुराना बयान दोहराया। खट्टा सिंह ने कहा था कि वर्ष 2012 से 2018 तक वह डेरा प्रमुख के खिलाफ इसलिए सामने नहीं आए थे, क्योंकि डेरा प्रमुख खुलेआम घूम रहा था। उसके परिवार को जान का खतरा था। खट्टा सिंह ने सीबीआई अदालत में बताया था कि यदि वह डेरा प्रमुख के खिलाफ पहले बयान दे देता तो उसे और उसके बेटे को डेरा प्रमुख जान से मरवा सकता था। उसे लगातार धमकियां मिल रही थीं। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में सीबीआई कोर्ट के समक्ष बयान दिया था कि उसे राम रहीम के खिलाफ बयान देने का दबाव डाला जा रहा है। खट्टा सिंह कह चुका था कि उसे इन मामलों में डेरा प्रमुख की भूमिका के बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन 25 अगस्त 2017 को गुरमीत सिंह के साध्वी यौन शोषण मामले में सजा होने के बाद खट्टा सिंह ने दोबारा गवाही देने के लिए मौका मांगा था।
सीबीआई ने साबित किया कृष्ण लाल की रिवाल्वर थी
सीबीआई ने चश्मदीदों के अलावा कोर्ट में यह भी साबित किया कि जिस रिवाल्वर से रामचंद्र को गोली मारी गई थी वह आरोपी कृष्ण लाल की लाइसेंसी रिवाल्वर थी। कृष्ण लाल ने 23 अक्तूबर को यह रिवाल्वर आरोपी निर्मल सिंह और कुलदीप को दी थी। इस तथ्य को सीबीआई ने ब्लेस्टिक एक्सपर्ट से भी कोर्ट में साबित करवाया। एक्सपर्ट ने कोर्ट में बताया था कि गोली उसी रिवाल्वर से चली थी, जोकि कृष्ण लाल के नाम पर रजिस्टर्ड थी।
20 साल की सजा काट रहा है डेरा प्रमुख राम रहीम
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। इस मामले में रामचंद्र छत्रपति ने साध्वियों का खत अपने अखबार में प्रकाशित किया था। आरोप है कि इसके बाद राम रहीम ने छत्रपति को मौत के घाट उतरवा दिया था। रामचंद्र के बेटे अंशुल छत्रपति ने बताया कि उनके पिता ने ही सबसे पहले गुरमीत राम रहीम के खिलाफ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखी पीड़ित साध्वी की चिट्ठी छापी थी। साल 2002 में इस रेप केस की जानकारी पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने पहली बार दी थी।
अंशुल छत्रपति ने न्याय के लिए लड़ी लंबी लड़ाई
रामचंद्र के बेटे अंशुल छत्रपति ने कोर्ट में याचिका दायर कर अपने पिता की मौत की सीबीआई जांच की मांग की थी। जनवरी 2003 में अंशुल ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सीबीआई से जांच करवाने के लिए याचिका दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने नवंबर 2003 में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। अपने पैतृक गांव दडबी में खेती किसानी करने वाला अंशुल अपनी मां कुलवंत कौर, छोटे भाई अरिदमन और बहन क्रांति और श्रेयसी के साथ अपने पिता को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ते रहे। अंशुल ने बताया कि उन्होंने एक ताकतवर दुश्मन के साथ इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ी है।