देशव्यापी हड़ताल को मिला सहयोग, यवनिका से निकाला रोष मार्च
- फुटपाथ वर्कर स्वरोजगार बचाओं संघर्ष समिति ने निकाला रोष प्रदर्शन
- रोष मार्च सेक्टर-5 स्थित यवनिका पार्क से सेक्टर-10, 11 में निकाला गया
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। सरकार के एक तरफा श्रम सुधार और श्रमिक विरोधी नीतियों के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संघों ने मंगलवार से दो दिन की देशव्यापी हड़ताल शुरू की। जिसका असर पंचकूला में भी देखने को मिला। पंचकूला में सैकड़ों कर्मचारी और मजदूर हड़ताल पर रहे और शहर में सरकार के खिलाफ रोष मार्च निकाला। रोष मार्च सेक्टर-5 स्थित यवनिका पार्क से सेक्टर-10, 11 में निकाला गया।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार के नक्शे कदम पर ही चलते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार ने भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए वादों में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, पंजाब के समान वेतनमान लागू करने, ठेका प्रथा पर रोक लगाने व न्यूनतम 15 हजार रुपये वेतन देने से भी पीछे हट गई है। 31 मई 2018 के हाईकोर्ट के फैसले पर विधानसभा में रेगुलराइजेशन एक्ट बनाने का वादा करके साफ मुकरना और फिर सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेकर मामले को लंबा खींच कर 4654 प्रभावित कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकारों की जनविरोधी व कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ कर्मचारी व मजदूर तथा परियोजना वर्कर की ये हड़ताल सरकार को सीधी चेतावनी है कि जनता व कर्मचारियों से किए गए वादों को पूरा करो वरना गद्दी छोड़ो। इस मौके पर आशा वर्कर, रोडवेज कर्मी और फुटपाथ वर्कर स्वरोजगार बचाओ संघर्ष समिति शामिल रही। कर्मियों ने बताया कि उनके द्वारा कल सेक्टर 6, 7, 8, 9 में रोष प्रदर्शन निकाला। रोष प्रदर्शन में श्रवण कुमार जांगडा, निर्मला देवी, रणधीर सिंह साथी, जयबीर ढांडा, सतबीर धनखड, रम्मा देवी, मास्टर विजय पाल, रणधीर राघव, सुमन, वंदना, मास्टर रणजीत सिंह, कामरेड अमर नाथ वर्मा, राम आसरे, विनोद क्षेत्रपाल, राम मिलन सुभाष व सतबीर मौजूद रहे।
मुख्य मांगें
- रोडवेज सहित सभी सरकारी विभागों के निजीकरण व ठेका प्रथा पर रोक लगाई जाए।
- पुरानी पेंशन व एक्सग्रेसिया रोजगार नीति बहाल की जाए।
- सभी कच्चे कर्मियों को कानून बनाकर पक्का किया जाए व हाईकोर्ट के फैसले से प्रभावित 4654 प्रभावित कर्मियों को सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।
- पंजाब के समान वेतनमान लागू किया जाए।
- जनवरी 2016 से बकाया सहित मकान किराया भत्ता का भुगतान किया जाए।
- वास्तविक खर्च पर आधारित कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू की जाए।
- आशा वर्कर, मिड डे मील व आंगनबाड़ी वर्कर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन दिया जाए।
- अप्रेंटिस व सक्षम को नियमित रोजगार की गारंटी दी जाए।
- सभी मजदूरों को पांच हजार रुपये न्यूनतम पेंशन दी जाए।