एचएमटी में सेब मंडी के निर्माण को 1400 पेड़ों पर चलेगी कुल्हाड़ी
- निर्माण कार्य शुरू होने से एचएमटी निवासी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। पिंजौर के एचएमटी में 108 एकड़ जमीन पर सेब मंडी का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इसके लिए 1400 पेड़ काटे जा रहे हैं। लेकिन सेब मंडी के निर्माण से न तो एचएमटी के सरकारी फ्लैट्स निवासी खुश हैं और न ही पिंजौर के लोग। सरकार ने पंचकूला निवासियों को परेशानी से निजात दिलाने के लिए सेब मंडी को पिंजौर में शिफ्ट करने का फैसला तो ले लिया। लेकिन निर्माण कार्य शुरू होने से पिंजौर की हरियाली पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर ध्यान देना उचित नहीं समझा। पिंजौर में प्रदूषण बढ़ने के साथ सड़कों की भी हालत बिगड़ेगी।
एशिया की सबसे बड़ी मंडी का निर्माण कार्य तो पिंजौर में शुरू हो गया है, लेकिन अभी तक इसका नक्शा निर्माण करने वाली कंपनी को नहीं मिला है। 100 करोड़ की लागत से तैयार हो रही सेब मंडी का निर्माण कार्य जुुलाई माह तक पूरा करना है। क्योंकि जुलाई माह से मंडी में कारोबार शुरू करने के कयास लगाए जा रहे हैं। मुंशी प्रवीण कुंडल के अनुसार अभी तक उन्हें केवल रोड वर्क का डिजाइन ही मिला है। मंडी में कुल पांच शेड बनने हैं, लेकिन यह पांच शेड कहां बनेंगे इसकी जानकारी नहीं है। फिलहाल मिट्टी डालकर भूमि को समतल किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या इस वर्ष भी सेब का व्यापार पंचकूला सेक्टर-20 स्थित मंडी में ही होगा। पिंजौर में बन रही सेब मंडी के विषय में जब एचटीएमटी निवासियों से बातचीत की गई तो उनकी प्रतिक्रिया कुछ इस तरह की आई।
सरकार यहां पर सेब और फल मंडी लगा रही है। जिससे वाहनों की आवाजाही के कारण प्रदूषण भी बढ़ेगा और एचएमटी के 1200 फ्लेटों में रह रहे लोगों की सुरक्षा भी दांव पर लगी रहेगी। क्योंकि सीजन के दौरान आने वाले वाहनों, व्यापारियों, लोडर्स में से किसी का ब्यौरा भी मार्केट कमेटी की ओर से नहीं रखा जाता। - रोशनलाल, एचएमटी निवासी।
सरकार यहां पर कोई कंपनी या इंस्टीट्यूट खोलती है तो लोगों को व्यापार भी मिलता है। इस दो - 4 महीने के सीजन में न तो किसी को व्यापार मिलेगा और न ही कोई शिक्षित हो पाएगा। जबकि एजूकेशन इंस्टीट्यूट के लिए यह एक बहुत बेहतरीन जगह थी। सरकार ने यहां सेब मंडी बनाने का निर्णय लेकर पिंजौर के पर्यटक स्थल को भी प्रदूषित करने का निर्णय ले लिया है। - जुवेधा बेगम, एचएमटी निवासी।
निर्माण कार्य के कारण रोजाना धूल मिट्टी उड़ती रहती है जिस कारण आसपास का एरिया प्रदूषित हो रहा और घरों में भी मिट्टी घुसती रहती है। मंडी बनने के बाद दुर्गंध के कारण तो और भी बुरा हाल हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़कों की हालत पहले से ज्यादा खराब हो जाएगी। - प्रेमो देवी एचएमटी निवासी।
हम यहां सेब मंडी के निर्माण से बिल्कुल भी खुश नहीं क्योंकि मंडी बनाने की आड़ में एचटीएमटी की हरियाली के साथ तो खिलवाड़ किया ही जा रहा है। साथ ही एरिया भी प्रदूषित हो रहा है। यहां रहना तो हमारी मजबूरी हो गई हैा अब तो हम रिटायरमेंट का इंतजार कर रहे ताकि यहां से जल्द शिफ्ट हो सके। - सुमन, एचएमटी निवासी।
क्या कहते हैं अफसरान
सेब मंडी के कारोबार का समय केवल दो से चार माह का होता है, ऐसे में इस क्षेत्र को किसी प्रकार से फायदा नहीं होने वाला। सरकार 100 करोड़ रुपये खर्च करना चाहती है तो कोई उद्योग लगाने में क्या परेशानी है? सेब मंडी का पिंजौर में निर्माण जनता के 100 करोड़ रुपये बर्बाद करना व एचएमटी की जमीन को खुर्द-बुर्द करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है, इस जनविरोधी मंसूबे को किसी भी हाल में पूरा नहीं होने दिया जाएगा। सरकार की ओर से सेब मंडी के प्रोजेक्ट को रद्द करने के लिए शीघ्र कोई कार्रवाई नहीं की गई तो पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। - विजय बंसल, एचएमटी बचाओ संघर्ष समिति के संरक्षक व पूर्व चेयरमैन।
मार्केटिंग बोर्ड सेब मंडी को विकसित कर रही है मैं पता करके बताता हूं बाकी अगर पेड़ काटने की परमिशन ली गई है तो काम प्रोसेस के अंदर ही होगा। - मुकुल कुमार, पंचकूला उपायुक्त।
सेब मंड़ी तैयार करने गवर्नमेंट का फैसला है। नवंबर में टेंडर पास हुआ था तब से हमने नक्शा बनाकर दे दिया था। फिलहाल एक ही शेड और सड़क की प्रोपोजल आया है बाकी सेब मंडी की चहारदीवारी बनने के बाद ही तय किया जाएगा कि मंड़ी में कहां क्या बनाया जाएगा? - अनिल गर्ग, एक्सईएन।
मुझे एचएमटी में बनाई जा रही सेब मंडी के विषय में कोई जानकारी नहीं इस विषय में मंडी कमेटी ही जानकारी रखती हैं क्योंकि सेब मंडी उनके द्वारा ही बनाई जा रही है। - अशोक शर्मा, मार्केट कमेटी चेयरमैन पंचकूला।
पेड़ काटने के लिए वन विभाग से परमिशन ली गई है। हम भी पर्यावरण को बनाए रखने के हक में हैं। सेब मंडी में जहां पेड़ों की आवश्यकता होगी वहां हम पेड़ लगाएंगे और पिंजौर की प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखने के लिए 100 प्रतिशत योगदान देंगे। बाकी जून 2019 तक हम मंडी तैयार कर देंगे जिसके अंदर दो शेड बेसिक नीड टॉयलेट, पानी और किसानों के रहने के लिए जगह बनाएंगे। - राजकुमार बेनिपाल, चीफ मार्केटिंग इनफोर्समेंट आफिसर, मंडी बोर्ड पंचकूला।
डेवलपमेंट कार्य है नार्थ इंडिया की सबसे बड़ी सेब मंडी बनने जा रही है उसके लिए थोड़ा बहुत करना पडे़गा। यह हमारे अच्छे के लिए ही है। - विशाल गर्ग, मार्केट कमेटी सेक्रेटरी पंचकूला।
पिछले वर्ष हुआ इतना व्यापार
पिछले वर्ष के सीजन में सेब मंडी में कुल 14,70,211 पेटी का व्यापार हुआ। जिसका अधिकतम रेट 2750 प्रति पेटी रहा। सीजन जुलाई माह से लेकर नवंबर माह तक हुआ। पंचकूला की सेक्टर-20 स्थित सेब मंडी में शिमला, कुल्लू और किन्नौर से सेब आता है। 2017 में सेब 1500 रुपये प्रति पेटी के रेट से बिका और कुल मिलाकर 1800 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ। जबकि 2018 में कुल मिलाकर 4 अरब, 4 करोड़, 30 लाख, 80 हजार, 250 रुपये यानी 400 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ। जबकि वर्ष 2017 में 1800 करोड़ रुपये का बिजनेस हुआ था।
पिंजौर में सेब मंडी बनने पर चंडीगढ़ को होगा नुकसान
एचएमटी में सेब मंडी तैयार हो गई तो चंडीगढ़ की सेब मंडी पूरी तरह बंद होने के कगार पर आ जाएगी। शिमला की ओर से आने वाला सेब सबसे पहले पिंजौर की सेब मंडी में ही पहुंचेगा, क्योंकि सेब किसानों के लिए पिंजौर हिमाचल से सबसे नजदीक पड़ता है। चंडीगढ़ आने पर भी सेब का वही रेट मिलेगा, जोकि पिंजौर में होगा। इसलिए इतनी दूर तक आने की लागत बचाने के लिए सेब किसान पिंजौर की मंडी का ही रुख करेंगे। बता दें वर्ष 2018 में चंडीगढ़ में केवल 3 आढ़ती ही बैठे थे।