आप विधायक रोढ़ी के शिअद में शामिल होने की चर्चा तेज
-रोढ़ी की सुखबीर बादल से मुलाकात को लेकर हलके में सियासी माहौल गरमाया
-रोढ़ी बोले- बदनाम करने के लिए विरोधी अफवाहें फैला कर रहे साजिश
अमर उजाला ब्यूरो
गढ़शंकर (होशियारपुर)। गढ़शंकर से आम आदमी पार्टी के विधायक जय किशन सिंह रोढ़ी के अकाली दल बादल में शामिल होने की चर्चा है। रोढ़ी की सुखबीर सिंह बादल से मुलाकात के बाद हलके में सियासी माहौल गरमा गया है। बताया जाता है कि रोढ़ी ने हलका बलाचौर से 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट देने की मांग करते हुए शिअद में शामिल होने का दम भरा है। हालांकि, रोढ़ी इस बात से इंकार कर दिया। लेकिन इन चर्चाओं के बाद से बलाचौर में अकाली नेताओं की गतिविधियों में अचानक तेजी देखी जा रही है।
गढ़शंकर के सियासी हलकों में चर्चा है कि आम आदमी पार्टी के विधायक जय किशन सिंह रोढ़ी पहले कांग्रेस के नेताओं से मिले पर वहां दाल गलती न देख कर गत सप्ताह चंडीगढ़ में शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल से मिले। सूत्रों के अनुसार रोढ़ी ने अकाली दल बादल में शामिल होने के लिए 2022 विस चुनाव में विधानसभा हलका बलाचौर से से टिकट देने की मांग की। इस बात को लेकर दोनों नेताओं में क्या बात फाइनल हुई है। इसकी जानकारी अभी किसी को नहीं है। लेकिन चर्चा है कि बलाचौर से चार बार विधायक रहे चौधरी नंद लाल ने सुखबीर सिंह बादल से मिलकर एतराज जताया है और बलाचौर हलके में अपनी गतिविधियों में अचानक तेजी ला दी है। चर्चा है कि आप विधायक जय किशन सिंह रोढ़ी आप के गिरते जनाधार व आप में पैदा हुए संकट को देखते हुए अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। बलाचौर हलके में समीकरण बदलते दिखने के बाद सूत्रों की माने तो पूर्व विधायक चौधरी नंद लाल व आप के प्रत्याशी रहे सेवानिवृत्त बिग्रेडियर राज कुमार के बीच भी गुप्त मीटिंग किसी सांझे रिश्तेदार के घर हुई जो तीन घंटे तक चली। वहीं, गढ़शंकर के विधायक जय किशन सिंह रोढ़ी ने कहा कि वह सुखबीर सिंह बादल से कभी नहीं मिले। यह अफवाह है जो मेरे विरोधी फैला कर मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह आप में है और आप में रहेंगे और आने वाले दिनों में हाईकमान के आदेशों के मुताबिक ही काम करेंगे।
उधर, पूर्व विधायक चौधरी नंद लाल ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल को कोई भी मिल सकता है। मुझे आप विधायक जय किशन सिंह रोढ़ी के सुखबीर बादल से मिलने या न मिलने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। पार्टी जब टिकट देती है तो ऐसे किसी के कहने पर नहीं दे देती। वह जीतने की कैपेसिटी के अलावा भी काफी कुछ देखती है।