हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट में कॉलेज छात्र समेत तीन बरी
अभियोजन पक्ष नहीं साबित कर पाया आरोप
सेक्टर-26 थाना पुलिस ने किया था मोहाली निवासी की शिकायत पर केस दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
रंजिश के कारण मोहाली निवासी युवक पर सेक्टर-27 में फायरिंग करने के खालसा कॉलेज के स्टूडेंट समेत तीन आरोपियों को जिला अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में उस समय खालसा कॉलेज का स्टूडेंट सुधीर कुमार, शिव नारायण उर्फ बाली उर्फ सोनू निवासी पानीपत और विजय कुमार उर्फ अंकित निवासी पानीपत शामिल हैं। तीनों के खिलाफ सेक्टर-26 थाना पुलिस ने दिसंबर में केस दर्ज किया था।
30 दिसंबर, 2016 को मोहाली के खुन्नी माजरा निवासी संदीप सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि वह शाम को सियाज कार से सामान लेने के लिए आ रहा था। जैसे ही वह सेक्टर-27 पहुंचा तो एक आई-20 कार में सवार पांच युवकों ने उसे रोक लिया। आरोपियों ने पहले संदीप की कार पर लोहे की रोड मारकर शीशा तोड़ डाला। हमला होते ही संदीप ने कार भगा दी। आरोपियों ने उसका पीछा करते हुए उस पर कई राउंड फायरिंग की। हालांकि फायरिंग में संदीप बाल-बाल बच गया और एक गोली उसकी कार की डिग्गी पर लगी। वहां से भाग कर संदीप सेक्टर-26 ट्रांसपोर्ट लाइट प्वाइंट पहुंचा और जब देखा कि आरोपी अभी भी उसके पीछे आ रहे हैं तो उसने पुलिस कंट्रोल रूम पर कॉल किया।
सूचना पाकर डीएसपी ईस्ट सतीश कुमार और एसएचओ सेक्टर-26 थाना जसपाल भुल्लर मौके पर पहुंचे। पुलिस संदीप को सेक्टर-27 में मौके पर ले गई। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि कॉलेज की रंजिश के चलते उस पर पांच युवकों ने हमला किया था। इनमें सुधीर कुमार, शिव नारायण उर्फ बाली उर्फ सोनू निवासी पानीपत और विजय कुमार उर्फ अंकित निवासी पानीपत समेत संपत शामिल था। एक अन्य को वह नहीं जानता था। संपत पर पहले भी मारपीट के कई मामले दर्ज हैं। सेक्टर-26 निवासी संपत की इस मामले में पुलिस गिरफ्तारी नहीं कर सकी थी, जबकि अन्य तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
कार की डिग्गी पर छेद गोली का नहीं साबित हुआ
बचाव पक्ष के वकील शेखर मोदगिल के अनुसार शिकायतकर्ता ने कहा था कि आरोपियों ने उस पर कई राउंड फायरिंग की जो उसकी कार की डिग्गी में लगे। लेकिन, कार की डिग्गी में लगे निशान फोरेंसिक जांच में गोली से लगे नहीं पाए गए। पुलिस ने केस में आरोपियों से लोहे की रॉड और डंडे बरामद दिखाए थे। यह आर्म्स एक्ट की श्रेणी में नहीं आते हैं। पुलिस के पास कोई इंडिपेंडेंट गवाह भी नहीं था। वहीं पुलिस हमले का कारण साबित नहीं कर पाई। इसके अलावा पुलिस कोई भी आरोप अदालत में साबित नहीं कर सकी।