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ऐसा शहीद जो बोले, ये दिल मांगे मोर

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ऐसा शहीद जो बोले, ये दिल मांगे मोर
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- चंडीगढ़ में बसी हैं शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की यादें
- कारगिल दिवस पर अपने कैप्टन को याद कर रहा सिटी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
सिर्फ 22 वर्ष की उम्र में कारगिल के महत्वपूर्ण बिंदु (प्वाइंट) को जीतने में अहम भूमिका निभाने वाले शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा अब भी अपने साथियों के दिलों में जिंदा हैं। जोश से भरे इस शहीद की शहादत को एक दशक बीत गया पर अब भी सिटी में उनके दोस्त उनका जिक्र सुनते ही यह जुमले दोहराते हैं ‘या तो मैं लहराते तिरंगे के पीछे आऊंगा, या तिरंगे में लिपटा हुआ आऊंगा, पर मैं आऊंगा जरूर’, ‘ये दिल मांगे मोर’।
चंडीगढ़ का डीएवी कॉलेज सेक्टर-10 हो या फिर पंजाब यूनिवर्सिटी का एमए अंग्रेजी विभाग या फिर सेक्टर-17 का एक सैलून। शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा यहां हीरो हैं। हों भी क्यों न, एक जीत के बाद वह चिल्लाते थे...ये दिल मांगे मोर।
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परमवीर चक्र शहीद कैप्टन के पिता गिरधारी लाल बत्रा बताते हैं कि विक्रम की बात एकदम अलग थी। उनका चयन आर्मी से पहले मर्चेंट नेवी में हो गया था। उनका हांगकांग में हेडक्वार्टर था। काफी अच्छी तनख्वाह थी, लेकिन अंत में उनके शहीद बेटे ने उस नौकरी को ठुकरा दिया, अपनी मां से बोले, मम्मी मुझको देश के लिए कुछ करना है। शहीद के पिता ने बताया कि विक्रम नेताजी सुभाष चंद्र बोस और चंद्रशेखर आजाद से प्रभावित थे और उन्होंने देश सेवा के लिए आर्मी में कमीशन लिया। उनके दूसरे बेटे विशाल बत्रा चंडीगढ़ में ही जॉब करते हैं। उनको सेना द्वारा कारगिल दिवस पर द्रास में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम में बुलाया गया है। डीएवी कॉलेज सेक्टर-10 के रविंदर चौधरी ने कहा कि विक्रम उनके यूथ क्लब में बैडमिंटन खेलने आते थे। उस दौरान उनका अंदाज ही अलग लगता था।

पाक का ‘ट्यूमर’ निकाल दीजिए
शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता ने कहा कि ऐसा लगता है कि पाकिस्तान को कश्मीर का ट्यूमर हो चुका है। इसकी सर्जरी जरूरी है। हमारे जवान रोजाना मरते हैं। अब जरूरी है कि इसका ऑपरेशन कर दिया जाए। जैसा ऑपरेशन भारत ने पहले किया था, उसी तरह का दोबारा किया जाना चाहिए।

चंडीगढ़ को पसंद करता था शहीद बेटा
गिरधारी लाल बत्रा ने कहा कि कैप्टन विक्रम डीएवी कॉलेज में चार साल पढ़े, उसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की, सीडीएस की तैयारी भी यहीं की और एमए अंग्रेजी में दाखिला लिया। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ से शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के दोस्त अब भी उन्हें फोन करते हैं।
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प्वाइंट 5140 छीना था दुश्मन से
19 जून, 1999 को कैप्टन विक्रम बतरा की लीडरशिप में इंडियन आर्मी ने घुसपैठियों से प्वांइट 5140 छीन लिया था। ये बड़ा महत्वपूर्ण और रणनीतिक प्वांइट था। इसे जीतते ही विकम अगले प्वांइट 4875 को जीतने के लिए आगे बढ़ गए थे, जो समुद्र तल से 17 हजार फुट की ऊंचाई पर और 80 डिग्री की चढ़ाई पर था। परमवीर चक्र पाने वाले विक्रम बत्रा आखिरी हैं। 7 जुलाई, 1999 को उनकी मौत एक जख्मी अफसर को बचाने के दौरान हुई थी। घायल अफसर को बचाते हुए कैप्टन ने कहा था, ‘तुम हट जाओ, तुम्हारे बीवी-बच्चे हैं’।
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