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ट्रेनिंग पर भेजने के बाद पंजाब ने कांस्टेबलों को हटाया, हाईकोर्ट ने पूछा क्यों न आदेशों पर रोक लगा दें

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ट्रेेनिंग पर भेजने के बाद कांस्टेबलों को हटाने के आदेश
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हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा, क्यों न आदेशों पर रोक लगा दी जाए
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पंजाब सरकार ने बीते साल 750 कांस्टेबल (ड्राइवर) को प्रोविजनल नियुक्ति देकर ट्रेनिंग पर भेज दिया और फिर उन्हें हटाने के आदेश जारी कर दिए। इन आदेशों को चुनौती देते हुए 116 कर्मियों ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आदेशों पर रोक लगाने की अपील की है। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार सहित डीजीपी, सेंट्रल रिक्रूटमेंट बोर्ड के चेयरमैन और अन्य प्रतिवादी पक्षों को 27 जून के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही पूछा है कि क्यों न इन कर्मियों को हटाए जाने के आदेशों पर रोक लगा दी जाए।
जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू ने यह नोटिस फाजिल्का के मनदीप सिंह सहित 116 प्रभावित कर्मियों की ओर से एडवोकेट एचसी अरोड़ा के जरिये दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। याचिका में अरोड़ा ने हाईकोर्ट को बताया कि सरकार ने बीते साल 15 अक्तूबर को जीना पुलिस कैडर के 750 कांस्टेबल (ड्राइवर) के पदों के लिए आवेदन मांगे थे। 24 दिसंबर को सरकार ने एक पब्लिक नोटिस जारी कर कहा था कि जो भी आवेदक बीए पास हैं और जो फिजिकल टेस्ट पास कर चुके हैं, उन्हें ड्राइविंग स्किल टेस्ट देना अनिवार्य नहीं होगा, बशर्ते कि उनके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस हो। 26 दिसंबर को सफल आवेदकों की प्रोविजनल मेरिट लिस्ट जारी कर दी गई, जिसमें सभी याचिकाकर्ता सफल हुए थे। उसी दिन सफल आवेदकों को प्रोविजनल नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए, जिसके तहत तीन वर्षों का प्रोबेशन पीरियड तय कर दिया गया।
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इस नियुक्ति प्रक्रिया के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी गई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि जिन सफल आवेदकों को अभी तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए हैं, उन्हें अगली सुनवाई तक नियुक्ति पत्र जारी न किए जाएं। इसी दौरान 4 मार्च को सरकार ने जिन्हें पहले प्रोविजनल नियुक्ति पत्र जारी किए थे, उन्हें औपचारिक तौर पर नियुक्ति पत्र जारी कर उन्हें ट्रेनिंग पर भेजे जाने को कहा गया। इसके खिलाफ फिर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी गई। इस पर कहा गया कि जिन्हें 17 जनवरी के बाद नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं, वे वापस ले लिए जाएंगे। हाईकोर्ट ने इस पर याचिका का निपटारा कर दिया था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार उन्हें बीते साल 26 दिसंबर को तीन वर्षों के प्रोबेशन पीरियड की शर्त पर प्रोविजनल नियुक्ति पत्र जारी किए गए थे। उन्हें 4 मार्च को तीन महीने की ट्रेनिंग में शामिल होने को कहा गया था, लेकिन अब सरकार ने 8 जून को एक अन्य आदेश जारी कर इन सभी याचिकाकर्ताओं को हटाए जाने के निर्देश दे दिए हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार उन्हें हटाए जाने से पहले कोई नोटिस तक नहीं भेजा गया और न ही हटाए जाने का कोई कारण ही बताया गया। लिहाजा, याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से उन्हें हटाए जाने के आदेशों को रद्द किए जाने की मांग की है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सभी प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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