चार राज्यों के साढ़े चार लाख कारोबारियों को राहत
- जीएसटी काउंसिल ने कंपोजिशन स्कीम की कर सीमा 75 लाख तक बढ़ाई, एक करोड़ तक बढ़ने की उम्मीद
- हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के छोटे व मंझले कारोबारियों को होगा बड़ा फायदा
- केंद्रीय शुल्क आयुक्त के क्षेत्रीय कार्यालय ने राज्य सरकारों को करवाया फैसले से अवगत
मोहित धुपड़
चंडीगढ़।
जीएसटी काउंसिल ने कारोबारियों के लिए कंपोजिशन स्कीम के तहत कर के दायरे में आने की सीमा रेखा 50 लाख से बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर दी है। काउंसिल के इस फैसले से हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के करीब साढ़े चार लाख से अधिक छोटे और मंझोले कारोबारी लाभान्वित होंगे। साथ ही इन कारोबारियों को हर महीने रिटर्न भरने की झंझट से भी छुटकारा मिलेगा।
केंद्रीय शुल्क (ऑडिट) आयुक्त के क्षेत्रीय कार्यालय ने जीएसटी काउंसिल के इस फैसले से उक्त राज्य सरकारों को अवगत करा दिया है। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ में करीब साढ़े चार लाख से अधिक छोटे और मध्यम कारोबारी ऐसे हैं, जिनका सालाना टर्नओवर 20 से 75 लाख है।
इन कारोबारियों में छोटे व मध्यम मैन्युफैक्चरर, सर्विस प्रोवाइडर और ट्रेडर्स शामिल हैं। उक्त राज्यों में ये कारोबारी अपने प्रदेश की सीमा में ही अपना छोटा-मोटा व्यवसाय चलाते हैं। ये कारोबारी अब जीएसटी की कंपोजिशन स्कीम के दायरे में होंगे। एडिशनल कमिश्नर राजन दत्त के अनुसार, जीएसटी से छोटे और मंझले कारोबारियों को बड़ा फायदा होगा। जीएसटी काउंसिल ने उनके लिए कंपोजिशन स्कीम में कर सीमा 75 लाख तक कर दी है। उम्मीद है कि काउंसिल इसे एक करोड़ भी कर सकती है।
छोटे कारोबारियों को ये हाेंगे फायदे
- कंपोजिशन कर स्कीम में आने के बाद इन कारोबारियों को हर महीने रिटर्न भरने की जरूरत नहीं होगी।
- तीन महीने में अपने रिटर्न भरनी होगी और एनुअल रिटर्न अगले वित्त वर्ष के दिसंबर माह तक भरनी होगी।
- मैन्युफैक्चरर को अपनी टर्नओवर पर सिर्फ दो प्रतिशत (एक प्रतिशत सीजीएसटी और एक प्रतिशत एसजीएसटी) देना होगा।
- सप्लायर और सर्विस प्रोवइडर (ढाबा, रेस्तरां इत्यादि) को सिर्फ पांच प्रतिशत (2.5 प्रतिशत सीजीएसटी और 2.5 प्रतिशत एसजीएसटी) देना होगा।
- छोटे ट्रेडर्स (प्रोविजनल स्टोर, छोटे विक्रेता इत्यादि) को सिर्फ एक प्रतिशत (0.5 प्रतिशत सीजीएसटी और 0.5 प्रतिशत एसजीएसटी) देना होगा।
- सीजीएसटी केंद्र सरकार वसूलेगी और सीजीएसटी संबंधित राज्य सरकार वसूलेगी।
इन शर्तों के दायरे में रहेंगे कारोबारी
- जीएसटी की कंपोजिशन स्कीम में आने वाले कारोबारियों व सप्लायर को अपने राज्य में रहकर ही कारोबार करना होगा
- यदि कोई कारोबारी मैन्युफैक्चरर और सप्लायर दोनों है, तो दोनों पर अलग-अलग कंपोजिशन टैक्स लगेगा
- कारोबारी किसी भी क्रेता और सर्विस लेने वाले ग्राहक से टैक्स नहीं वसूलेंगे
- ये कारोबारी कंपोजिट कर दाता बनने के बाद न तो इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करेंगे और न ही इसका लाभ लेंगे।