वीर चक्र प्राप्त कैप्टन निर्मल सिंह के भूला प्रशासन
- अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचा सरकारी अमला
अमर उजाला ब्यूरो
मुकेरियां ।
वीर चक्र विजेता कैप्टन निर्मल सिंह का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्हें साल 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का प्रदर्शन करने को लेकर वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। मुकेरिया के गांव चनौर के कैप्टन निर्मल सिंह साल 1957 में भारतीय सेना की जम्मू-कश्मीर राइफल्स रेजीमेंट (जैक राइफल्स) में भर्ती हुए थे। 28 साल सेना में रह कर देश की सेवा करने के बाद वह 1987 में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने 1962 में चीन युद्ध, तथा 1965 व 71 में पाकिस्तान के खिलाफ हुए तीन युद्धों में बहादुरी का परिचय दिया। साल 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में वे घायल हो गए थे। इसी दौरान साल 1972 में उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया था। 16 को 2017 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। शनिवार को उनके पैतृक गांव चनौर में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
जैक राइफल्स की टुकड़ी ने उन्हें सलामी दी। चिता को मुखाग्नि उनके बेटे सब इंस्पेक्टर राजिन्दर सिंह ने दी। हालांकि वीर चक्र प्राप्त कैप्टन निर्मल सिंह को श्रद्धांजलि देने शासन प्रशासन की और से कोई भी उच्चाधिकारी नहीं पहुंचा। इसे लेकर परिवार के लोगों ने नाराजगी जाहिर की। इस मौके पर जसप्रीत सिंह, कैप्टन रघवीर सिंह, सौदागर सिंह, हरतरन पाल, हरजीत सिंह, केवल सिंह, दविन्द्र सिंह, सेवा सिंह, सुरजीत सिंह सरपंच, प्यारा सिंह, जसवंत सिंह, अवतार सिंह, वचित्र सिंह, विशन सिंह, मेजर सिंह उपस्थित थे।
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