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छात्रों ने बनाया बैलून सैटेलाइट

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दीक्षांत स्कूल के 12 छात्रों ने बनाया बैलून सैटेलाइट
- 30 किमी की ऊंचाई तक जाकर एकत्रित कर सकेगा डाटा
- हीलियम गुब्बारे की मदद से छोड़ा जाएगा आसमान में

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जीरकपुर स्थित दीक्षांत स्कूल के 12 छात्रों की एक टीम ने ‘दीक्षांत सेट-1’ नामक एक हाई एल्टीट्यूड बैलून सैटेलाइट तैयार किया है। यह सैटेलाइट 99,000 फीट यानी करीब 30 किलोमीटर ऊंचाई (स्ट्रेटोस्फियर) पर जाकर वायुमंडलीय दबाव, आर्द्रता, तापमान, ऊंचाई आदि विभिन्न पर्यावरणीय मापदंडों को हासिल करने और इसमें लगे कैमरे की मदद से पूरी यात्रा का वीडियो बनाने में सक्षम हो सकेगा। इस सैटेलाइट को औपचारिक तौर पर मार्च अंत तक लांच कर दिया जाएगा। स्मार्ट सर्किट्स इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में छात्रों को इसे बनाने में करीब छह माह का समय लगा।
सैटेलाइट को हीलियम गैस के एक गुब्बारे की मदद से स्ट्रेटोस्फियर में ले जाया जाएगा। जैसे जैसे गुब्बारा ऊंचाई हासिल करेगा वायुमंडलीय दबाव में कमी के कारण इसका विस्तार होता जाएगा और अंत में यह फट जाएगा। तभी सैटेलाइट से जुड़ा पैराशूट स्वचालित रूप से खुल जाएगा और सैटेलाइट पूर्वानुमानित लैंडिंग क्षेत्र में आकर उतरेगा जहां से टीम उसे ले आएगी और उसमें स्टोर डाटा को प्राप्त कर लेगी। स्मार्ट सर्किट्स इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में दीक्षांत स्कूल के 9वीं एवं उससे ऊपर की कक्षाओं के 12 छात्रों ने इस उपग्रह को डिजाइन और विकसित किया है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए), भारत सरकार और अन्य सरकारी एजेंसियां दीक्षांत सेट-1 हाई एल्टीट्यूड बैलून सेटेलाइट को लॉन्च करने के लिए पहले ही मंजूरी दे चुकी हैं।
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कैन सेट, दीक्षांत सेट बनाने के बाद क्यूब सैट बनाने का लक्ष्य
ये सभी छात्र काफी समय से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। कैन सेट, दीक्षांत सेट बनाने के बाद छात्रों को इसरो के सहयोग से अंतरिक्ष में क्यूब सैटेलाइट (लगभग 10-सेंटीमीटर के छोटे उपग्रह) पर काम करने के लिए एक खास मिशन और अंतरिक्ष में लक्ष्य को लॉन्च करने का फैसला लिया है। स्कूल प्रबंधन का मानना है कि यह सब सीखते हुए छात्रों को इसरो और नासा के विशेषज्ञों से मिलने और बातचीत करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा, जोकि छात्रों के भविष्य के लिए काफी लाभदायक साबित होगा।
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