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भारत भाग्य विधाता

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भारत भाग्य विधाता -3
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वोट से ही बनता है लोकतंत्र ..सोच समझकर करें इस्तेमाल

चंडीगढ़ का युवा मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए भारत भाग्य विधाता का बना हमसफर

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अमर उजाला के भारत भाग्य विधाता अभियान का कारवां अब बढ़ चला है। शहर का युवा वर्ग अब इसका हिस्सा बनकर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए संकल्पित है। वह खुद भी राजनीति पर पैनी नजर रखे हुए है। उसे अपने मुद्दे पता हैं। भविष्य को लेकर पूरी तरह से गंभीर यह युवा वर्ग अब खोखली राजनीति को बदलने के लिए वोट करना चाहता है। ओछे बयानों से आहत यह वर्ग चाहता है कि नेताओं के भाषण में आरोप प्रत्यारोप की जगह देश और शहर के विकास का विजन होना चाहिए। पीयू के छात्रों से बात की हमारी संवाददाता मोनिका नागर ने।

वोट ला सकता है बड़ा परिवर्तन..प्रक्रिया में शामिल हों: गैली पन्नू, उर्दू डिपार्टमेंट
वोट हमारा अधिकार है और हमें इसका सही प्रयोग करना चाहिए। हमारा एक वोट बड़ा बदलाव ला सकता है। मतदान से जी चुराने का मतलब है कि हम अपने संविधानिक अधिकारों को खो रहे हैं। किसी भी देश के मतदान प्रतिशत से पता चलता है कि वहां के नागरिक कितने जागरूक हैं। यदि आप किसी भी नेता को वोट नहीं देना चाहते तो नोटा का इस्तेमाल करें।
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दोस्तों को भी वोटिंग के लिए करूंगी प्रेरित: अमनदीप कौर, पंजाबी डिपार्टमेंट
पहली बार वोट करूंगी। बहुत उत्साहित हूं। मेरा मानना है कि आज का युवा ही देश का भविष्य है। हमें पढ़ाई के साथ साथ राजनीति पर भी पूरी नजर रखनी चाहिए। किसी की बातों में आकर वोट नहीं देना चाहिए बल्कि सोच समझकर ही वोट का इस्तेमाल करना चाहिए। यह ध्यान रखना चाहिए कि जिस सांसद को आप चुनने जा रहे हैं, वह पांच साल तक आपके शहर में विकास कर भी पाएगा या नहीं। उसके बारे में पूरी पड़ताल करनी चाहिए। मैं अपने दोस्तों को भी वोटिंग के लिए प्रेरित करूंगी।

कोई नेता पसंद नहीं तो नोटा का करें इस्तेमाल: अमनप्रीत कौर, साइकोलॉजी डिपार्टमेंट
देश और शहर के विकास के लिए यह जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा नागरिक वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा लें। वोट करते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि आप जिसे चुन रहे हैं, उस नेता की छवि पाक साफ है या नहीं। यदि चुनाव में खड़ा कोई भी प्रत्याशी आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है तो मतदान का बायकॉट न करें। आप पोलिंग बूथ पर जाएं और नोटा दबाएं। हमेशा महिला सुरक्षा के बारे में नेताओं से सवाल पूछें।

युवा और एनजीओ उठाएं जागरूकता की जिम्मेदारी: परमिंद्र कौर, साइकोलॉजी डिपार्टमेंट
मेरी नजर में सभी दल एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। लोकतंत्र में चुनी जाने वाली सरकार पांच साल तक जनता की सेवा करती है। इन पांच साल में आप सभी सांसदों का रिपोर्ट कार्ड देखें। अपने शहर के सांसद के कामों पर बारीकी से नजर रखें। शहर के वास्तविक मुद्दों पर उसकी क्या राय है, यह जानें। इसके बाद वोट करने जाएं। मतदान प्रतिशत बढ़ाने की भारत भाग्य विधाता मुहिम में यूथ और एनजीओ बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी निभाएं।

आपके वोट से कोई गलत नेता नहीं जीतना चाहिए: गुरदीप सिंह, इवनिंग डिपार्टमेंट
सरकारें या सांसद हम पर राज करने के लिए नहीं, बल्कि हमारी सेवा के लिए हम चुनते हैं। सबसे पहले यह सोच दूर करनी होगी कि वे हम पर राज कर रहे हैं। लोकतंत्र में सत्ता जनता के पास होती है और उसे चलाने वाले जनसेवक होते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि यूथ अपने अधिकारों के लिए जागरूक बने। अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए सांसद से सवाल पूछें। जिस सांसद को चुन रहे हैं कि क्या उसके पास युवाओं की समस्याओं को दूर करने के लिए कोई रोडमैप है। यदि नहीं तो नोटा का विकल्प चुनें। यूं ही औपचारिकता निभाने के लिए वोट न करें। कहीं ऐसा न हो कि आपके वोट से कोई गलत नेता चुनकर संसद पहुंच जाए।
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बहकावे में आकर न करें वोट- जगजीत सिंह, इवनिंग डिपार्टमेंट
मैंने हमेशा वोटिंग के लिए लोगों को जागरूक किया है। अपने दोस्तों के साथ हमेशा इस तरह के अभियान का हिस्सा बनता रहा हूं। साथ ही लोगों से चुनाव के मुद्दों पर चर्चा भी करता हूं। वर्तमान में टीवी पर चल रही डिबेट व चुनाव कार्यक्रमों को ध्यान से देखता हूं। अखबार पढ़ता हूं। सोशल मीडिया पर नजर रखता हूं। इस सबके बाद अपना होमवर्क करता हूं। इसका निष्कर्ष यही निकलता है कि हमें किसी के बहकावे में आकर वोट नहीं करना चाहिए। पूरी तरह सोच समझकर सही प्रत्याशी को चुनकर संसद भेजना चाहिए। क्योंकि हमारे शहर और देश के विकास का रास्ता वहीं से निकलता है।



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