500 विश्वविद्यालयों के हजारों शिक्षकों को प्रो. राजकुमार ने दिया न्यू ईयर तोहफा
- वर्षों से फंसा पीएचडी इंक्रीमेंट यूजीसी सेकराया पास, शिक्षकों के हो सकेंगे प्रमोशन
- कई वीसी आए लेकिन फंसा हुआ था पेंच, पीयू के वीसी ने जाकर एक ही दिन में करा दिया काम
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने देशभर के हजारों शिक्षकों को पीएचडी इंक्रीमेंट के जरिये नए साल का तोहफा दिया है। यूजीसी में वर्षों से इसको लेकर पेंच फंसा हुआ था, जो वीसी ने एक ही दिन में यूजीसी जाकर निकाल दिया। अब शिक्षकों के प्रमोशन चार साल में हो सकेंगे। अब तक छह साल में प्रमोशन हो रहे थे। साथ ही पीएचडी की डिग्रियों पर तलवार भी लटकी हुई थी। पीयू के शिक्षकों की मांग पर वीसी ने यह कदम उठाया। पीयू के जरिये ही देश के अन्य 500 विश्वविद्यालयों के हजारों शिक्षकों को इसका लाभ मिल गया। अब वीसी पीएचडी इंक्रीमेंट के बाद शिक्षकों को एरियर दिलाने की तैयारी कर रहे हैं।
ये था मामला
यूजीसी ने गाइड लाइन जारी कर दी थी कि वर्ष 2009 से पहले की जितने भी पीएचडीधारी शिक्षक हैं उन्हें इंक्रीमेंट का लाभ नहीं मिलेगा। पीएचडी पुराने तरीकों से की गई थीं। साथ ही इन डिग्रियों पर सवाल भी उठ रहे थे। इसके चलते इन शिक्षकों का प्रमोशन चार साल की जगह छह साल में हो रहा था। साथ ही इंक्रीमेंट भी नहीं लग रहा था। प्रमोशन में भी कई तरह की बाधाएं आ रही थीं। देशभर के इन शिक्षकों ने आवाज उठाई, लेकिन मामला शॉर्टआउट नहीं हो पा रहा था। यूजीसी भी अपनी गाइड लाइन पर ही अड़ा हुआ था। पीयू के लगभग 200 शिक्षक इससे प्रभावित हो रहे थे। हाईकोर्ट में भी यह मामला चल रहा था। इसी बीच पीयू में वीसी के पद पर बीएचयू के मैनेजमेंट के प्रो. राजकुमार को नियुक्त किया गया और इन शिक्षकों के लिए नए रास्ते खुल गए। तीन ही माह में पीयू को यह बड़ी उपलब्धि हासिल हुई।
इस तरह मिली कामयाबी
सूत्रों के मुताबिक वीसी प्रो. राजकुमार ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद सभी प्रमुख मामलों को देखा। उसमें शिक्षकों का पीएचडी इंक्रीमेंट भी था। उसके बाद उन्होंने यूजीसी के चेयरमैन डॉ. डीपी सिंह से मुलाकात की। उन्होंने पूरा मामला तथ्यों सहित उनके सामने रखा। उसके बाद गाइड लाइन जांच के लिए एक पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई। सभी गाइड लाइन देखी गईं। आखिर में शिक्षकों के पक्ष में बड़ा निर्णय लिया गया और पीएचडी इंक्रीमेंट को मंजूरी दे दी गई। बताया जाता है कि यूजीसी चेयरमैन डॉ. डीपी सिंह बीएचयू के वीसी रहे हैं। उस दौरान वीसी प्रो. राजकुमार उनके करीब रहे।
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वीसी की इस तरह हुई वाह-वाह
15 दिसंबर को हुई सीनेट की बैठक में भले ही कई मामलों को लेकर विरोध हुआ हो, लेकिन सीनेट के शिक्षक सदस्यों ने वीसी प्रो. राजकुमार का दिल से धन्यवाद किया। पुटा अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल ने शिक्षकों की ओर से उनका आभार जताया। वहीं प्रो. अजय रंगा, प्रो. डीपी रंधावा ने कहा कि यह कार्य वीसी ने नहीं बल्कि प्रो. राजकुमार ने अपने संबंधों के जरिये कराया है। यह अपने में बड़ा काम है। देशभर के हजारों शिक्षकों को यह लाभ मिला है।
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कार्यभार ग्रहण करने के बाद मैंने खुद पीएचडी इंक्रीमेंट मामले को प्रमुखता से लिया और यूजीसी में तथ्यों सहित पैरवी की। उसके बाद पुटा ने भी मेरे समक्ष यह मांग रखी थी। अब यूजीसी ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। इससे हजारों शिक्षकों को लाभ मिलेगा।
- प्रो. राजकुमार, वाइस चांसलर, पीयू