अभी तो ट्रेलर, लोकसभा चुनाव तक दिखेगी पूरी फिल्म
एक-दूसरे गुट में सेंधमारी करने में जुटे रहते हैं नेता
लोकसभा चुनाव तक गुटबाजी और भी उभर कर आएगी सामने
राजेश ढल्ल
चंडीगढ़। अतिक्रमण हटाओ कमेटी के चेयरमैन चुनाव में उभरी गुटबाजी सिर्फ एक ट्रेलर है। फिल्म के सीन आगे लोकसभा चुनाव तक कई बार छोटे-बड़े हिस्सों में देखने को मिलेंगे। असल लड़ाई लोकसभा चुनाव में पार्टी का टिकट लेने की है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में सांसद किरण खेर और भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन दोनों ही पार्टी के प्रबल दावेदार हैं। दोनों ही पार्टी की टिकट के लिए प्रयास कर रहे हैं, इसलिए दोनों ने पिछले दो माह से शहर में अपनी गतिविधि भी बढ़ा दी है।
दोनाें गुट एक-दूसरे के नेताओं और पार्षदों पर सेंधमारी कर रहे हैं। मेयर चुनाव के समय टंडन गुट के 13 पार्षदों ने देवेश मोदगिल को उम्मीदवार बनाए जाने का विरोध किया था। जैसे ही पार्टी ने मोदगिल को उम्मीदवार बनाया, उसी समय पूर्व मेयर राज बाला मलिक और महेश इंद्र सिद्ध टंडन गुट छोड़कर सांसद किरण खेर गुट में शामिल हो गए। इन दोनों नेताओं का कहना है कि वह संगठन के साथ हैं, जबकि अतिक्रमण हटाओ कमेटी के चुनाव में हुई शक्ति देव शाली की हार को सांसद किरण खेर गुट अपनी जीत मान रहा है क्योंकि इससे भी टंडन गुट में सेंधमारी हो गई है। इस चुनाव में टंडन गुट के दो पार्षदों के वोट दलीप के पक्ष में डलवाने में कामयाबी मिली बताई जा रही है। दो माह से भाजपा पार्षद चंद्रवती शुक्ला और उनके पति गोपाल शुक्ला टंडन गुट में हैं। यह दोनों नेता सांसद किरण खेर से नाराज चल रहे हैं, जबकि मेयर चुनाव तक चंद्रवती शुक्ला सांसद किरण खेर गुट में थीं। इस समय शहर में प्रशासन और केंद्र सरकार की ओर से करवाए जा रहे कामों का क्रेडिट लेने में भी सांसद किरण खेर और भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन के गुट भी खींचतान चल रही है। हाईकमान भी इन दोनों की गुटबाजी खत्म करने में पूरी तरह से असफल रहा है।
अपनों की खिलाफत में कर रहे नेता
इस समय नगर निगम में कांग्रेस के सिर्फ 4 पार्षद हैं, जबकि भाजपा के 20 पार्षद हैं। इसके बाजवूद नगर निगम में सदन की बैठक में मेयर को अपने ही पार्टी के पार्षदों का विरोध सहन करना पड़ता है। ऐसे में कांग्रेस को भाजपा की गुटबाजी को सामने लाने में कुछ ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़ता। कांग्रेस का मानना है कि इस गुटबाजी का फायदा उन्हें आने वाले लोकसभा चुनाव में मिलेगा। पिछले लोकसभा चुनाव में सीनियर नेताओं की गुटबाजी के कारण ही पार्टी ने टिकट किरण खेर को दी थी, जबकि उस समय खेर चुनाव लड़ना भी नहीं चाहती थीं, लेकिन भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन, पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन की भारी गुटबाजी के कारण पार्टी ने खेर को टिकट देकर भेजा, जबकि सांसद किरण खेर के टिकट लेकर आने पर भी अपनी ही पार्टी के पार्षदों ने विरोध किया था।
कोट
भाजपा नेताओं और पार्षदों की गुटबाजी पूरा शहर जानता है। गुटबाजी के कारण ही नगर निगम में वित्तीय संकट छाया है। भाजपा की गुटबाजी का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। इसका जवाब देने के लिए लोकसभा चुनाव में शहर के मतदाता इंतजार में बैठे हैं।
-प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष