हमारी आंख ही पत्थर की हो गई वरना...
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हमारी आंख ही पत्थर की हो गई वरना, कहां हुआ है अभी आसमां पत्थर का। प्रसिद्ध साहित्यकार माधव कौशिक की इस कविता ने पंजाब कला भवन में आयोजित कवि दरबार में सभी का दिल जीत लिया। डॉ. एमएस रंधावा लिट्रेचर फेस्टिवल में चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के चेयरमैन माधव कौशिक के अलावा कई अन्य कवियों ने शिरकत की। यह आयोजन पंजाब आर्ट्स काउंसिल की ओर से किया जा रहा है।
चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में मंजीत इंद्रा, सुशील दोसांझ, सरदार पंछी, विवेक, सुरेंद्र गिल, सुखविंदर अमृत मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता गुलजार संधू ने की। पंजाब कला परिषद के चेयरमैन व प्रसिद्ध कवि सुरजीत पातर विशेष रूप से मौजूद रहे। माधव कौशिक ने खुली किताब से शाम-ओ-शहर गई, आओगे दोपहर में तारें भी नजर आएंगे सुनाया। इसके साथ ही अभी तो हाथ ही काटे गए हैं सपनों के, जमीं पर टूट कर सपनों के सर भी आएंगे। सरदार पंछी की प्रेम पर आधारित शायरी ने लोगों का दिल जीत लिया।