पटाखों ने 12 मरीजों की आंखों की रोशन कम कर दी
पीजीआई में पटाखों से आंखों के चोट के कुल 36 मरीज पहुंचे
शहर के सभी अस्पतालों में आंखों की चोट के कुल 59 मरीज आए
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ऐसा माना जा रहा था कि इस बार आतिशबाजी का समय कम है तो आंखों की चोटों के मरीज भी कम आएंगे। मगर हुआ उल्टा। पिछली बार पीजीआई में कुल 37 मरीज आए थे, जबकि इस बार 36। इनमें से 16 ऐसे मरीज हैं, जिनकी आंखों की सर्जरी होनी है। इनमें से 12 मरीजों की आंखों की रोशनी प्रभावित होने के आसार हैं। 36 में से आधे मरीज वे हैं, जो पटाखे फोड़ नहीं बल्कि देख रहे थे। पीजीआई के एडवांस आई सेंटर ने हर साल की तरह इस बार भी डॉक्टरों की विशेष ड्यूटी लगाई हुई थी। छह नवंबर को एक मरीज पहुंचा। सात को 26 और आठ को नौ मरीज पहुंचे। एडवांस आई सेंटर के एचओडी डॉ. एमएस डोगरा ने बताया कि कुल मरीजों में 18 ट्राइसिटी के हैं, जबकि बाकी आसपास के प्रदेशों से। इनमें एक दो साल का बच्चा भी शामिल है। बच्चे की एक आंख की रोशनी जा चुकी है। डॉक्टरों के मुताबिक घायलों में 11 ऐसे मरीज है, जिनकी उम्र 16 साल से कम है।
घर में गिरे पटाखे की चिंगारी ने पहुंचाया नुकसान
पंजाब के मानसा के रहने वाले एक परिवार की 5 साल की गुड़िया घर में ही हादसे का शिकार हो गई। घर के दरवाजे पर खड़ी गुड़िया आतिशबाजी देख रही थी, तभी एक पटाखा उसके पास आकर गिरा और उससे निकली चिंगारी ने उसकी आंख पर चोट पहुंचाया। ऑपरेशन के बावजूद बाई आंख की रोशनी पर काफी नुकसान पहुंचा है।
10 साल के रुस्तम की एक आंख की गई रोशनी
हरियाणा के टोहाना के रहने वाले 10 साल के रुस्तम की एक आंख की रोशनी चली गई है। डॉक्टरों की मानें तो आंख की रोशनी आएगी या नहीं, अभी कहा नहीं जा सकता। छठी क्लास में पढ़ने वाले रुस्तम पटाखे चला रहा था, लेकिन जब पटाखा नहीं चला तो वह दोबारा उसे देखने जाने लगा, उसी दौरान वह फट गया।
पटाखा देखने से गई रोशनी
पंजाब के मानसा की रहने वाली 9 साल की शायरा की दाईं आंख में काफी गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों ने बताया कि शायरा का ऑपेशन तो कर दिया गया है, लेकिन आंखों की रोशनी पर कुछ कह पाना मुश्किल है। परिजनों ने बताया कि शायरा आतिशबाजी देख रही थी, जिस वक्त पटाखे की चिंगारी उसकी आंख में लगी।
आंख फटकर बाहर आ गई
पीजीआई के मुताबिक घायलों में एक 33 साल का पुरुष भी है, जिसकी आंख पटाखा फटने के दौरान बाहर ही निकल गई। मरीज मौलीजागरां का बताया जा रहा है। मरीज की बहन के मुताबिक आग लगने के बाद जब पटाखा नहीं फटा तो वह उसे चेक करने चला गया। उसने पटाखा हाथ से उठा लिया और उसी समय फूट गया। इससे उसकी एक आंख फटकर बाहर आ गई।
किस साल कितने मरीज आए
साल आंखों की सर्जरी
2011 8
2012 13
2013 22
2014 17
2015 13
2016 26
2017 37
2018 34 अभी तक
बाकी अस्पतालों में आए मरीज
दिवाली में पटाखों से घायल 10 मरीज जीएमसीएच 32 में इलाज के लिए पहुंचे। इन मरीजों में 3 मरीज आई इंजरी को लेकर आए थे, जिन्हें वीरवार को ही इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं, सेक्टर-22 में बर्न इंजरी का एक, सेक्टर-45 सिविल हॉस्पिटल में बर्न इंजरी के 8, मनीमाजरा में बर्न इंजरी के 12 व आई इंजरी के 6, जीएमएसएच सेक्टर-16 में बर्न इंजरी के 28 मरीज और आई इंजरी के 14 मरीज।
कोट
आई इंजरी के 12 मरीज गंभीर हैं। इन मरीजों की आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। आपरेशन के बाद इनकी रोशनी तो प्रभावित होगी। इस बार उन मरीजों की संख्या ज्यादा है, जो आतिशबाजी देख रहे थे। ऐसे में आतिशबाजी करने के साथ उसे देखने पर भी सावधानी बरतनी होगी।
-डॉ. प्रियंका चारू चावला, असिस्टेंट प्रोफेसर आई सेंटर पीजीआई