बीमारियों के इलाज के लिए हुई उपचार विधियों की खोज
- पीजीआई का 56वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया
- मुुख्य अतिथि पूर्व प्रोफेसर लुइक गुलेविन ने 25 कर्मचारियों को सम्मानित किया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बीमारियों के इलाज के लिए उपचार विधियों की खोज हुई। वैज्ञानिक प्रमाण के साथ व्यवस्थित वेस्कुलर डिजीज के प्रबंधन में प्रतिमान का बदलाव होता रहता है। विभिन्न एएनसीए प्राप्त होने वाली दवाएं शरीर को प्रतिरोधक क्षमता से बचाती हैं। वेस्कुलर डिजीज के इलाज में प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाते हैं, जिसमें हमारे शरीर के छोटी रक्त वाहिकाएं शामिल होती हैं।
ये बातें कोचीन हॉस्पिटल यूनिवर्सिटी ऑफ पेरिस विश्वविद्यालय के मेडिसिन एंड थेरेपीटिक्स के पूर्व प्रोफेसर लुइक गुलेविन ने पीजीआई के 56वें स्थापना दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि कहीं। उन्होंने दुर्लभ रोगों की देखभाल और नैदानिक अनुसंधान पर एक विस्तृत व्याख्यान दिया। प्रोफेसर गुलेविन रक्त वाहिकाओं की सूजन के कारण रोगों का एक समूह वेस्कुलर डिजीज के क्षेत्र में विश्व के ख्याति प्राप्त प्रोफेसर हैं। प्रोफेसर दुर्लभ बीमारियों और इनके प्रमाण विकसित करने के लिए व्यवस्थित अध्ययन कर रहे हैं। जीवन की खतरनाक बीमारियों का उपचार बेहद मुश्किल हैं। इस चुनौती को दूर करने के लिए उन्होंने 1981 में फ्रांस के सहयोग से वेस्कुलर डिजीज अध्ययन समूह स्थापित किया था।
नाक के द्वारा होता है रक्तस्राव
फ्रांसीसी समूह की स्थापना के विषय में प्रोफेसर गुलेविन ने बताया वेस्कुलर डिजीज बीमारी के रोगियों को नाक के माध्यम से रक्तस्राव, खून बहने, गुर्दे की विफलता इत्यादि की शिकायत हो सकती है। चूंकि इस बीमारी ने प्रकृति को रोक दिया है, इसलिए उन्होंने इस बीमारी के रख रखाव के लिए नए वैज्ञानिक सबूतों के बारे में बताया। इनके अलावा, उन्होंने भविष्य के अध्ययनों के बारे में बताया जो कि पाइपलाइन में हैं। कई प्रश्नों के उत्तर देने के लिए जो अब भी अनुत्तरित हैं। इनके उपचार की आवश्यकता कितनी देर है और कितनी बार उपचार की आवश्यकता है।
पीजीआई को मिल चुके हैं कई अवार्ड
इससे पूर्व निदेशक पीजीआई प्रोफेसर जगत राम ने मुख्य अतिथि को संस्थान के नवीनतम विकास के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पीजीआई ने इलाज में गुणवत्ता, रोगी देखभाल, अकादमिक कार्यक्रमों और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर उन्नयन में शानदार विस्तार किया है। निदेशक ने कहा कि पीजीआई को ब्रिटिश मेडिकल जरनल द्वारा देश का सर्वश्रेष्ठ अस्पताल और द वीक मैगजीन द्वारा दूसरा सर्वश्रेष्ठ अवार्ड प्रदान किया गया है। इसके अलावा भारत सरकार ने दो बार पीजीआईएमईआर को देश के सबसे स्वच्छ अस्पतालों में से एक के रूप में चुना है। इस मौके पर प्रोफेसर गुलेविन द्वारा 25 पीजीआई कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। उन्हें यादों के साथ प्रशंसा प्रमाण पत्र दिए गए।
11 सौ शोध पत्र हुए प्रकाशित
चिकित्सा शिक्षा और शोध के संकाय में पिछले साल अनुदान के रूप में 33 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। जिसमें करीब 1100 शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। हमारे शोध को दिखाने के लिए पीजीआई में हर वर्ष रिसर्च-डे मनाया जाता हैं। चिकित्सा विशेषताओं में 5396 छात्र और सर्जिकल विशिष्टताओं में 2717 स्टूडेंट्स को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में डिग्री प्राप्त हुई है। पीजीआई 16 एमडी पाठ्यक्रम, 04 एमएस पाठ्यक्रम, 23 डीएम पाठ्यक्रम और 07 एमएच कोर्स चलाता है। इसके अलावा यहां डेंटल, नर्सिंग और मेडिकल टेक्नोलॉजी कोर्स के अलावा पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं।