जो टूर्नामेंट मैंने जीता आज वहीं बेटी जीती, गर्व है : पीवी लक्ष्मी
गोपीचंद की बेटी गायत्री गोपीचंद पुलेला बनी चैंपियन
चंडीगढ़।
ऑल इंडिया जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप के पहले संस्करण को एक प्लेयर के नाते जीतने में जितनी खुशी हुई। उसी टूर्नामेंट 25 सालाें बाद अपनी लक्ष्मी के जीतने पर एक मां होने के नाते मुझे गर्व महसूस हो रहा है। यह कहना है स्टार बैडमिंटन प्लेयर और कोच गोपीचंद पुलेला की पत्नी पीवी लक्ष्मी का। जोकि रविवार को पंजाब यूनिवर्सिटी में आयोजित श्रीमती कृष्णा खेतान मेमोरियल ऑल इंडिया जूनियर रैंकिंग प्राइज मनी बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबलाें को देखने के लिए मौजूद रही। लड़कियाें के अंडर-19 फाइनल में गायत्री गोपीचंद पुलेला ने मुंबई की पूर्वा भारवे को हराकर टाइटल को जीतने में कामयाबी पाई।
16 वर्ष में मैने जीता और 14 साल की बेटी बनी चैंपियन : गोपीचंद पुलेला की पत्नी पीवी लक्ष्मी जोकि खुद नेशनल लेवल की बैडमिंटन प्लेयर रही हैं, इन्हाेंने वर्ष 1991 में श्रीमती कृष्णा खेतान मेमोरियल ऑल इंडिया जूनियर रैंकिंग प्राइज मनी बैडमिंटन टूर्नामेंट को पहला संस्करण जीता था। उन्हाेंने बताया कि जब मैंने यह टूर्नामेंट जीता था तो मेरी उम्र 16 वर्ष की थी। आज मेरी बेटी ने इसी टूर्नामेंट को 14 वर्ष मे जीता है।
बेटी में आत्मविश्वास बड़ रहा है
पीवी लक्ष्मी ने कहा कि जिस तरह से गायत्री ने टूर्नामेंट को मैच द मैच जीता। उससे उसमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है। मेरी बेटी ने इस टूर्नामेंट से पहले मुझे कहा था कि आप हर मैच की वीडियो बनाना। इसलिए हर मैच की वीडियो बनाई है। ताकि वह इन मैचाें के दौरान अपनी खामियाें को दूर कर सके। मेरी बेटी 14 साल की है। कोच के कहने पर अंडर-17 वर्ग में खेलना को कहा तो बेटी ने उनकी बात मानते हुए अपने से अधिक आयु वर्ग में खेला और विजेता भी बनी।
पूरा परिवार बैडमिंटन के खेल को समर्पित
देश को पीवी सिंघू जैसे इंटरनेशनल खिलाड़ी देने वाले खेल रतन द्रोणाचार्य अवार्डी कोच गोपीचंद पुलेला की पूरी फ ैमली बैडमिंटन के खेल से जुड़ी हुई है। गोपी चंद खुद एक स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी रहे। उनकी पत्नी पीवी लक्ष्मी नेशनल लेवल की बैडमिंटन प्लेयर रही। अब बेटी गायत्री गोपीचंद पुलेला और बेटा साई विष्णु गोपीचंद इस खेल में परिवार का नाम रोशन कर रहे हैं।
खेल के साथ पढ़ाई में भी अव्वल
गायत्री गोपीचंद पुलेला के कोच अनिल कुमार ने बताया कि गायत्री खेल के साथ साथ पढ़ाई के मामले में कभी कोताही नहीं बरती। दिन में खेल साथ वह रोजाना पढ़ाई केलिए कोचिंग क्लास जाती है। सुबह 9 बजे से ट्रेनिंग शुरू हो जाती है जोकि लगातार तीन घंटे चलती है। इन्हाेंने बताया कि गोपीचंद पुलेला इंटरनेशनल प्लेयर को ट्रेनिंग देने मे व्यस्त रहते हैं। इसलिए कोचिंग की जिम्मवेदारी फिलहाल मुझे सौंपी गई है।